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जमात को नहीं रोका तो ये बांग्लादेश को बना देंगे पाकिस्तान, छात्र नेता घबराए, चुनाव से पहले ही पार्टी खत्म?


जमात-ए-इस्लामी से गठबंधन होने के बाद NCP के कई नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। वहीं जमात ने NCP को 350 सीटों में से सिर्फ 30 सीटों पर ही लड़ने को कहा है। छात्र नेताओं का मानना है कि उनके संघर्ष को जमात ने हाईजैक कर लिया है।
बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस की सरकार ने 12 फरवरी को चुनाव करवाने का ऐलान कर रखा है। उससे पहले देश में नामांकन फॉर्म भरे जा रहे हैं और शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी के चुनाव लड़ने पर रोक है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की प्रमुख बेगम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान देश लौट आए हैं और उन्होंने दो सीटों से नामांकन दाखिल किया है। माना जा रहा है कि बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री तारिक रहमान ही होंगे। लेकिन उससे पहले जमात-ए-इस्लामी, इस राजनीतिक उठापटक का पूरा फायदा उठाने की फिराक में है और उसका मकसद, बांग्लादेश को भी पाकिस्तान की तरह ही कट्टर इस्लामिक राष्ट्र बनाने की है, जिसे NCP का समर्थन हासिल है।
नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP) का गठन पिछले साल शेख हसीना की सरकार के खिलाफ हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद छात्र नेताओं ने बनाया था। लेकिन अब ये पार्टी टूटने लगी है। जमात ए इस्लामी जैसे कट्टर इस्लामवादी संगठन से गठबंधन करने की वजह से पार्टी के कई सीनियर छात्र नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। NCP, जब बनी थी, तो पूरी तरह से जमात-ए-इस्लामी के साथ थी, और अब पार्टी के अंदर ही कई लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं। कुछ लोग चुनाव से पहले जमात के साथ गठबंधन करना चाहते हैं, जबकि दूसरों को लगता है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को अकेले चुनाव में जाना चाहिए और एक कट्टर मजहबी संगठन से तालमेल नहीं करना चाहिए। इसक बीच NCP में एक ऐसा भी गुट बन गया है जो दोनों में से किसी का भी हिस्सा नहीं बनना चाहता और उसने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
क्या नेशनल सिटिजन्स पार्टी खत्म हो जाएगी? – मौजूदा हालात ये हैं कि पार्टी के भीतर वैचारिक मतभेद, इस्तीफों की बाढ़ और गठबंधन को लेकर गहरा असमंजस पैदा हो गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि राजनीतिक विश्लेषक यह तक कह रहे हैं कि NCP चुनाव से पहले ही टूट सकती है या पूरी तरह खत्म हो सकती है। बांग्लादेश पर नजर रखने वाले जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि जमात से दूर होने का यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है। कई नेताओं को एहसास हो गया है कि अगर जमात का कंट्रोल रहा, तो यह देश को पाकिस्तान को सौंपने जैसा होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि उनकी सोच गलत नहीं है। ISI का स्वागत, वीज़ा नियमों में ढील और पाकिस्तान के लिए समुद्री रास्ता खोलना, कई लोगों को एक खतरनाक ट्रेंड लग रहा है। उन्हें एहसास है कि ISI बांग्लादेश को भारत के खिलाफ आतंकवाद का लॉन्च पैड बनाने की कोशिश कर रहा है।