
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने इस हफ्ते मोबिलिटी पैक्ट पर साइन किए हैं। इसका मकसद ईयू के 27 सदस्य देशों में भारतीय छात्रों, कर्मचारियों और प्रोफेशनल्स की आवाजाही आसान बनाना है। यह पैक्ट ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिकी सरकार ने भारतीय नागरिकों के लिए H1-B वीजा को महंगा और मुश्किल बना दिया है। ऐसे में विदेश जाने की चाह रखने वाले भारतीय कामगारों और छात्रों के लिए ये पैक्ट बड़ी राहत लेकर आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये पैक्ट लाखों भारतीयों के सपने को सच करने वाला साबित हो सकता है।
मोबिलिटी पैक्ट के लिए नए फ्रेमवर्क के तहत ईयू ने भारतीय छात्रों के लिए बिना किसी सीमा के मोबिलिटी (आवाजाही) का वादा किया है। इससे भारतीयों को ईयू के देशों में यात्रा करने, पढ़ाई करने और काम करने में आसानी हो जाएगी। ईयू देशों में करीब 1.20 लाख भारतीय छात्र हैं। इनमें जर्मनी में सबसे ज्यादा 50,000 हैं, जिससे वहां भारतीय छात्र देश में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा ग्रुप बन गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 800,000 से ज्यादा भारतीय यूरोपीय संघ के देशों में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट – मोबिलिटी पैक्ट स्टूडेंट और वर्कर्स के साथ भारतीय रिसर्चर्स के लिए रास्ते खोलता है।भारत और यूरोप में यह समझौता इसलिए उम्मीद जगा रहा है क्योंकि भारत में युवाओं की बड़ी तादाद है। दूसरी ओर यूरोप में घटते वर्कफोर्स की समस्या है। ऐसे में नया समझौता भारतीय इंजीनियरों, केयर वर्कर्स, हॉस्पिटैलिटी स्टाफ और ड्राइवरों के लिए रास्ते आसान बनाएगा।
Home / News / भारत-यूरोप डील से लाखों भारतीयों की होगी बल्ले-बल्ले, होगा रेड कार्पेट वेलकम, एक्सपर्ट ने बताया फायदा
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