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ICC T20 विश्व कप पर पाकिस्तान-बांग्लादेश के ड्रामे से भारत को नुकसान या फायदा? 5 पॉइंट्स में समझें


टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच क्रिकेट की दुनिया में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने खेल की साख और कूटनीति दोनों को हिलाकर रख दिया है। भारत, आईसीसी, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच शुरू हुआ यह विवाद अब केवल मैदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राजनीति और इतिहास के काले पन्ने भी खुल गए हैं।
कैसे शुरू हुआ विवाद और क्या रहा नतीजा? – यह विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में टी20 वर्ल्ड कप खेलने से इनकार कर दिया। इसके तुरंत बाद पाकिस्तान ने भी बांग्लादेश के समर्थन में भारत के खिलाफ अपना मैच न खेलने की धमकी दी। हफ्तों चले तनाव के बाद, लाहौर में हुई त्रिपक्षीय बैठक के साथ यह मुद्दा इस तरह खत्म हुआ कि आईसीसी और भारत को भारी नुकसान झेलना पड़ा, जबकि विरोध करने वाले दोनों बोर्ड फायदे में रहे।
BCCI और ICC को कैसे लगा बड़ा झटका? समझें 5 बड़े कारण
1. बांग्लादेश का इलेक्शन कार्ड और भारत विरोधी एजेंडा – बांग्लादेश सरकार ने अपने देश में आगामी चुनावों को देखते हुए भारत विरोध को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया। वहां की जनता के बीच भारत के प्रति नफरत फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई। टी20 वर्ल्ड कप का बहिष्कार करना इसी एजेंडे का हिस्सा था। बांग्लादेश इसमें सफल रहा, क्योंकि उन्होंने अपनी जनता को यह संदेश दिया कि वे भारत के सामने नहीं झुकेंगे, भले ही उन्हें वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच का त्याग करना पड़े।
2. बिना किसी जुर्माने के ‘सेफ’ रहे बागी बोर्ड – आमतौर पर किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट का बहिष्कार करने पर संबंधित बोर्ड पर भारी जुर्माना और प्रतिबंध लगाया जाता है। लेकिन इस मामले में हैरानी की बात यह रही कि आईसीसी, पीसीबी और बीसीबी की बैठक के बाद यह तय हुआ कि बांग्लादेश पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। टूर्नामेंट के ब्रॉडकास्टर्स को करोड़ों का नुकसान देने के बावजूद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पूरी तरह सुरक्षित रहा, जो आईसीसी की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
3. बहिष्कार के बदले मिला भविष्य का ICC टूर्नामेंट – इसे क्रिकेट इतिहास का सबसे अनोखा फैसला माना जा रहा है। टूर्नामेंट छोड़ने पर सजा मिलने के बजाय बांग्लादेश को आईसीसी की ओर से इनाम मिला। आईसीसी ने वादा किया है कि साल 2028 से 2031 के बीच बांग्लादेश को एक बड़े आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी दी जाएगी। इस तरह बांग्लादेश ने इस साल होने वाले नुकसान की भरपाई भविष्य के एक बड़े निवेश के रूप में कर ली। इन सबके बीच भारत और आईसीसी कुछ भी नहीं कर सके।
4. BCCI के एकाधिकार को चुनौती देने का संदेश – पाकिस्तान और बांग्लादेश ने मिलकर पूरी दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश की है कि बीसीसीआई अपनी आर्थिक ताकत के बावजूद अकेले सब कुछ तय नहीं कर सकता। उन्होंने साबित किया कि अगर क्रिकेट बोर्ड एकजुट होकर दबाव बनाएं, तो आईसीसी को झुकना ही पड़ता है, भले ही उनकी मांगें अतार्किक ही क्यों न हों। पीसीबी अपने इस मकसद में कामयाब रहा कि वह भारत के प्रभुत्व को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नुकसान पहुंचा सके। उन्होंने यह संदेश दिया है कि आईसीसी को गलती करके भी झुकाया जा सकता है।
5. इतिहास को भुलाकर पाकिस्तान की गोद में बैठा बांग्लादेश – सबसे दुखद पहलू यह रहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश के लोगों को यह यकीन दिलाने में सफल रहा कि भारत उनका शुभचिंतक नहीं है। यह वही बांग्लादेश है जिसे 1971 में पाकिस्तान के अत्याचारों से भारत ने ही आजादी दिलाई थी। आज एक खेल और राजनीति के चक्कर में बांग्लादेश ने उस इतिहास और भारत के बलिदान को भुलाकर पाकिस्तान के साथ हाथ मिला लिया है, जो रणनीतिक रूप से भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।