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रूस को सबसे बड़ा झटका, एशिया के इस वफादार दोस्त ने भी मोड़ा मुंह, पुतिन से नहीं खरीदेगा हथियार

एशिया में रूस को बहुत बड़ा झटका लगा है। भारत पहले ही रूसी हथियार खरीदना कम कर चुका है। अब एक और वफादार दोस्त वियतनाम ने रूसी हथियारों से मुंह मोड़ लिया है। वियतनाम की वायुसेना, पारंपरिक तौर पर रूसी लड़ाकू विमानों पर निर्भर रही है। उसके पास 16 Su-22M4 जेट, 9 Su-22UM3K ट्रेनर विमान, 5 Su-27SK फाइटर जेट, 5 Su-27UBK ट्रेनर जेट, 35 Su-30MK2 मल्टीरोल फाइटर जेट और 12 Yak-130 ट्रेनर विमान शामिल हैं। लेकिन भारत की तरह ही वियतनाम ने भी 2022 के बाद से अपने हथियार खरीद में विविधता लानी शुरू कर दी।
ताजा रिपोर्ट्स से पता चला है कि वियतनाम और फ्रांस के बीच राफेल फाइटर जेट के लिए एक बड़ी डील होने जा रही है। दोनों देशों के बीच की बातचीत एडवांस स्तर तक पहुंच चुकी है। 2024 से ही जानकारी आ रही थी कि वियतनाम, फ्रांसीसी विमान में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है, लेकिन अब ये डील करीब करीब फाइनल हो चुकी है। इसके अलावा, 2013 में दोनों देशों ने एक द्विपक्षीय डिफेंस कोऑपरेशन एग्रीमेंट पर भी साइन किए थे।
बात सिर्फ रूसी लड़ाकू विमानों तक ही सीमित नहीं है। लड़ाकू विमानों के अलावा भी कई दूसरे हथियार हैं, जिनको लेकर वियतनाम रूस के अलावा दूसरे विकल्पों की तलाश कर रहा है। जैसे रूस से और T-90S टैंक ऑर्डर करने के बजाय, वियतनाम ने इजरायली हिस्सेदारी के साथ अपने पुराने T-54 और T-55 टैंकों को अपग्रेड करने और उसे आधुनिक बनाने का फैसला किया है। अमेरिका ने साल 2016 में वियतनाम को हथियार बेचने को लेकर लगाए गये प्रतिबंध हटा लिए थे, उसके बाद से वो करीब 400 मिलियन डॉलर के अमेरिकी हथियार और उपकरण खरीद चुका है। जिनमें कोस्ट गार्ड वेसल और ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट शामिल हैं। वियतनाम अब अमेरिका से C-130J ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने पर भी विचार कर रहा है।
राफेल से पहले वियतनाम ने अमेरिका से F-16 फाइटर जेट खरीदने के लिए बातचीत की थी। लेकिन ऐसा लग रहा है कि बात नहीं बनी है। बताया जा रहा है कि वियतनाम का डिफेंस बजट, जो सिर्फ 10 अरब डॉलर सालाना है, उसके लिए अमेरिकी विमान खरीदना और लगातार उसके मेंटिनेंस का खर्च उठाना काफी मुश्किल होता। हालांकि एक दिक्कत ये भी है कि रूसी लड़ाकू विमान से फ्रांसीसी विमान की तरफ जाने पर वियतनाम को अपने एयरबेस इंफ्रास्ट्रक्चर और इको-सिस्टम को पूरी तरह से बदलना होगा। उसे अब एविएशन हथियारों का पूरी तरह से नया स्टॉक बनाना होगा, क्योंकि उसके पास जो मौजूदा रूसी मिसाइल और हथियार हैं, वो राफेल में इंटीग्रेट नहीं हो पाएंगे।
फ्रांस, दक्षिण कोरिया से रक्षा साझेदारी – देखने को मिल रहा है कि वियतनाम, रूस को छोड़ फ्रांस और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ रक्षा साझेदारी बढ़ा रहा है। वियतनाम दक्षिण कोरिया से K9 155-mm सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर खरीदने के लिए भी बातचीत कर रहा है। माना जा रहा है कि वियतनाम, NATO देशों की तरफ से इस्तेमाल होने वाले हथियार सिस्टम को अपने डिफेंस फोर्स के साथ इंटीग्रेशन के लिए ज्यादा काम कर रहा है। फिर भी, वियतनाम को रूसी हथियारों से पूरी तरह से निर्भरता खत्म करने में अभी कई साल लगेंगे। लेकिन इतना कहा जा सकता है कि रूस ने हथियार बाजार में अपने एक विश्वसनीय और वफादार दोस्त को खो दिया है।