Friday , March 13 2026 10:09 AM
Home / News / ईरानी राष्ट्रपति ने जंग रोकने के लिए रखी 3 शर्तें, बताया युद्ध खत्म करने का एकमात्र तरीका, रूस और पाकिस्तान निभा रहे रोल

ईरानी राष्ट्रपति ने जंग रोकने के लिए रखी 3 शर्तें, बताया युद्ध खत्म करने का एकमात्र तरीका, रूस और पाकिस्तान निभा रहे रोल


ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि तेहरान शांति के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने युद्ध खत्म करने के लिए तीन शर्तें सामने रखी हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई यहूदी शासन और अमेरिका की वजह से शुरू हुए थी और यह तभी खत्म हो सकती है जब ईरान के अधिकारों को मान्यता दी जाए।
रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बात – सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पेजेश्कियान ने कहा कि उन्होंने रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बात की है और इस इलाके में शांति के लिए ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने आगे कहा कि इस लड़ाई को खत्म करने का एकमात्र तरीका ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता देना, हर्जाना देना और भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने के लिए इंटरनेशनल गारंटी साबित होनी चाहिए।
रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बात करते हुए मैंने इस इलाके में शांति के लिए ईरान के वादे को फिर से पुष्ट किया है। जायोनी शासन और अमेरिका की वजह से शुरू हुई इस लड़ाई को खत्म करने का एकमात्र तरीका ईरान के कानूनी अधिकारों को पहचानना, हर्जाना देना और भविष्य में हमलों के खिलाफ पक्की इंटरनेशनल गारंटी देना है।
मसूद पेजेश्कियान, राष्ट्रपति, ईरान – ईरानी राष्ट्रपति का बयान ऐसे समय में आया है जब लड़ाई रोकने के लिए कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं। रूस ईरानी नेतृत्व के साथ करीबी संपर्क बनाए हुए है और दुश्मनी खत्म करने की अपील कर रहा है। इस बीच पेजेश्कियान ने जंग रोकने के लिए शर्त रखकर बता दिया है कि ईरान युद्ध रोकने को तैयार है लेकिन अमेरिका और इजरायल के सामने झुकने को तैयार नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि ईरान इतनी मजबूती के साथ कैसे बात कर रहा है।
ईरान क्यों जारी रख सकता है जंग? – मि़डिल ईस्ट मामलों के एक्सपर्ट कबीर तनेजा का कहना है कि तीन मुख्य कारण है, जिससे ईरान को कुछ समय तक युद्ध को जारी रखने में दिक्कत नहीं होगी-
1- अमेरिका विरोधी रवैया क्रांति के मुख्य सिद्धांत के तौर पर युद्ध में सरकार को विचारधारा के हिसाब से और मजबूत करेगा। इससे 1979 से चले आ रहे अमेरिका की मौत के नारे के फिर से बढ़ावा मिल सकता है।
2- अमेरिका और इजरायल से लड़ने वाला युद्धकाल का अयातुल्ला (सुप्रीम लीडर) अपना बेस और स्थिति मजबूत करेगा। अली खामेनेई की हत्या के बाद सुप्रीम लीडर बने मोजतबा के लिए इसका इस्तेमाल सभी गुटों से समर्थन जुटाने के लिए जरूरी है, जो ईरानी राजनीति को मजबूत करते हैं।
3- आखिर में, IRGC के लिए पिछले कुछ बहुत बड़ी नाकामी के रहे हैं। खासकर अयातुल्ला खामेनेई की हत्या। अयातुल्ला की सत्ता के केंद्र के एक हथियारबंद ग्रुप के तौर पर यह उसके अस्तित्व का सवाल है।