
अमेरिका ने ईरान में मार गिराए गए अपने लड़ाकू जेट के पायलट को सफलतापूर्वक बचा लिया है। इसे अमेरिकी फोर्स की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है क्योंकि पायलट ईरान के दूर दराज के इलाके में फंस गया था। इस पूरे मिशन के दौरान अमेरिकी सेना ने कुछ ऐसा किया है, जो पहली नजर में चौंकाने वाला लगता है। दरअसल पायलट को बचाने के मिशन के अंजाम देने वाली अमेरिकी फोर्स की यूनिट ने ईरान में अपने विमान को आग के हवाले किया है।
अमेरिकी फोर्स ने ईरान के अंदरूनी इलाकों में पायलट के बचाव अभियान के दौरान अपने एक कीमती मिलिट्री विमान को नष्ट कर दिया। इस विमान की कीमत करीब 9,27,73,40,000 रुपए बताई गई है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि ऑपरेशन में शामिल यह एयरक्राफ्ट तकनीकी खराबी के कारण ईरान में फंस गया था। एयरक्राफ्ट को उड़ाना संभव नहीं था और उसके दुश्मन आर्मी के हाथों में पड़ने का खतरा था।
अमेरिका ने अपना विमान नष्ट किया – ईरान में विमान गिरने के बाद अमेरिकी फोर्स ने ऑपरेशन शुरू किया और अपने एयरमैन को ढूंढ़ निकाला। इसके बाद उसे ईरान के अंदर बनी अस्थायी हवाई पट्टियों पर इंंतजार कर रहे MC-130J कमांडो II विमानों तक पहुंचाया गया। इसी दौरान अमेरिका के लिए नई मुश्किल खड़ी हुई, जब इनमें से एक या दो विमान खराब हो गए और उड़ने की स्थिति में नहीं रहे।
अमेरिकी विमानों में खराबी रेगिस्तान की नरम जमीन में फंस जाने के कारण आई। दूसरी ओर यूनिट के पास ना तो विमानों को वापस लाने का कोई तरीका था और ना उनको ठीक करने का कोई इंतजाम था। वहीं ईरानी सेना के करीब पहुंच जाने का भी डर था। ऐसे में अमेरिकी कमांडरों को बहुत कम समय में इनको नष्ट करने का एक मुश्किल फैसला लेना पड़ा।
अपने हाथों लगाई कीमती जेट मे आग – अमेरिकी यूनिट को ईरानी सेना के आने से पहले अपने पायलट को लेकर सुरक्षित निकलना था। ऐसे में उन्होंने विमान को ऐसे ही छोड़ने के बजाय आग लगाने का फैसला लिया। विमान की संवेदनशील सैन्य तकनीक के ईरानियों के हाथों में पड़ने का जोखिम होने के चलते अमेरिकी सेना ने ईरान की जमीन पर फंसे हुए अपने विमानों (संख्या स्पष्ट नहीं) को नष्ट कर दिया।
अमेरिकी फोर्स ने ईरान में जिस जेट को नष्ट किया है। ऐसे हर विमान की कीमत 100 मिलियन डॉलर (9,27,73,40,000 भारतीय रुपए) से ज्यादा बताई गई है। इस विमानों में आधुनिक संचार, नेविगेशन और विशेष ऑपरेशन सिस्टम लगे होते हैं। यानी ये विमान विरोधी पक्ष को मिल जाएं तो उसको अमेरिकी तकनीक के बारे में काफी कुछ पता चल सकता है।
अमेरिकी यूनिट को बहुत कम समय में अपने पायलट को लेकर निकलना था। ईरानी सेना की टुकड़ी के पहुंचने की सूरत में चीजें बदल सकती थीं। विमान की सैन्य तकनीक के ईरानियों के हाथों में जाने से रोकने के लिए उसे जलाना पड़ा। यह फैसला जोखिम वाले ऑपरेशनों में अपनाए जाने वाले प्रोटोकॉल को दिखाता है।
सैन्य तकनीक सबसे अहम – सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला जोखिम वाले ऑपरेशनों में अपनाए जाने वाले आम प्रोटोकॉल को दिखाता है। यह फोर्स की ट्रेनिंग का हिस्सा होता है कि आपके लिए दुश्मन के हाथ गोपनीय उपकरण लगने से रोकना ज्यादा जरूरी है ना कि विमान के नष्ट होने से होने वाले आर्थिक नुकसान की फिक्र करनी होती है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विमान पर हमले के बाद ईरान में उतरे अमेरिकी अधिकारी ने पहाड़ों में छिपकर और ईरानी टीमों से बचते हुए 7,000 फुट ऊंची पहाड़ी चोटी तक चढ़कर अपनी जान बचाई। इस अभियान में अमेरिकी एजेंसी सीआईए ने ईरानी अधिकारियों को अपने एयरमैन की जगह के बारे में गुमराह करने के लिए भी अभियान चलाए।
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