
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया है। इंसानों ने सदियों के संघर्ष के बाद जिस सभ्य समाज को बनाने की कोशिश की डोनाल्ड ट्रंप का पोस्ट उस भ्रम को तोड़ता है। ऐसा लग रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप हर दिन एक नया डेडलाइन लेकर आ रहे हैं, एक नये अल्टीमेटम के साथ सोशल मीडिया पोस्ट करते हैं, धमकियां देते हैं और बहुत सीधे शब्दों में कहें तो एक ‘गुंडे’ की तरह व्यवहार करते हैं। जैसे गली मोहल्ले की लड़ाई में होता है बिल्कुल उसी तरह से।
ट्रंप की चेतावनी विनाश मचाने वाली धमकियों से शुरू होती है और इसमें एक डेडलाइन होता है। फिर लोग कयास लगाने लगते हैं कि वो आखिर क्या करने वाले हैं? क्या वो सचमुच कोई कदम उठाएंगे या पलट जाएंगे। चूंकी अमेरिका के पास वो शक्ति भी है इसलिए उनकी धमकियों को किसी दूसरे देश की धमकी की तरह ये नहीं कहा जा सकता कि ट्रंप जिस धमकी की बात कर रहे हैं वो उसपर अमल नहीं कर सकते हैं। ट्रंप अपनी धमकियों पर अमल भी कर चुके हैं और पलट भी चुके हैं। इसीलिए होर्मुज को लेकर वो क्या करेंगे ये सबसे बड़ा सवाल है। आज रात डेडलाइन खत्म होने वाली है।
ट्रंप की होर्मुज पर चेतावनी से क्या समझ में आ रहा? – ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया पर जिन शब्दों के साथ ईरान को चेतावनी दी है वो आप सोशल मीडिया पर पढ़ सकते हैं। उन शब्दों को यहां हम नहीं लिख सकते हैं। ट्रंप अपने पोस्ट में गालियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, तबाही की चेतावनी दे रहे हैं और ऐसे अंजाम की धमकी दे रहे हैं जो पहले कभी नहीं देखी गई है। लेकिन उनका पोस्ट एक पैटर्न का ही हिस्सा है। ट्रंप बुधवार शाम के बाद क्या वाकई कहर बरपाएंगे ये शाम बीतने के बाद ही पता चलेगा। कुछ भी पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता।
ट्रंप की धमकियों के पैटर्न को ध्यान से देखें तो पता चलता है कि उनके शब्द जितने खतरनाक होते हैं, आग उगलने वाले होते हैं या गुस्से वाले होते हैं जिनमें वो ‘पूरी तरह तबाही’ जैसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, उसके बाद वो उतनी ही ज्यादा अच्छे से बातचीत की शुरुआत करते हैं। 2017 में उत्तर कोरिया के साथ हुआ टकराव इसका सबसे साफ उदाहरण है। पहले गंभीर चेतावनियां और धमकियां कि अमेरिका ‘नॉर्थ कोरिया को पूरी तरह तबाह कर सकता है’ लेकिन उसके बाद उन्होंने किम जोंग उन के साथ ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया।
हालांकि जब ट्रंप की धमकियां बहुत ज्यादा केन्द्रित होती हैं, किसी तय मांग से जुड़ी होती हैं और किसी ठोस कार्रवाई के जवाब के तौर पर दी जाती हैं तो नतीजा कुछ और ही होता है। ऐसे मामलों में धमकियों के बाद अक्सर कार्रवाई भी होती है। जैसे 2020 में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नेता कासिम सुलेमानी की हमले के बाद हत्या, 2017 और 2018 में सीरिया में US के हमले, रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर तय की गई साफ “रेड लाइन” के उल्लंघन के बाद हुए थे। हर मामले में हमले की वजह साफ थी और उसके बाद कार्रवाई भी हुई।
होर्मुज पर ट्रंप की चेतावनी दूसरी तरह की धमकी है! – होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप की चेतावनी के पैटर्न से पता चलता है कि ये दूसरी कैटोगिरी की चेतावनी है। यानि ये कोई आम धमकी नहीं है। इसमें एक मांग है कि होर्मुज स्ट्रेट को खोल दो। इसके लिए उन्होंने समय सीमा तय की है। पहले पांच दिन, फिर 10 दिन और अब बुधवार रात तक। इसका उल्लंघन करने पर उन्होंने कार्रवाई और नतीजों के बारे में भी बताया है। ये मेल बहुत मायने रखता है। ट्रंप जब आम चेतावनी से हटकर किसी समय सीमा के साथ मांगों को रखते हैं तो कार्रवाई करने की संभावना काफी ज्यादा होती है। इसलिए ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की संभावना काफी ज्यादा नजर आती है।a
Home / News / होर्मुज स्ट्रेट पर बुधवार को ईरान के लिए क्या वाकई नरक का दरवाजा खोलेंगे या पलट जाएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति? समझें
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