
ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव हर व्यक्ति पर मंडराता है। जिसे उनका जीवन प्रभावित होता है। तभी तो कहा जाता है की कोई भी शुभ काम से पहले मुहूर्त का चयन जरूर करें ताकि काम बिना किसी विध्न के सफल हो सके। भारतीय ज्योतिष के अनुसार पंचक को अशुभ माना गया है। धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद एवं रेवती ऐसे ही नक्षत्र हैं जिनमें कोई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए। धनिष्ठा के आरंभ से रेवती नक्षत्र के अंत तक जो समय होता है उसे पंचक कहा जाता है। ज्योतिषचार्यों के अनुसार कुछ विशेष ग्रह-नक्षत्रों में किए गए कार्य अनंत गुणा फल देते हैं और कुछ अशुभ प्रभाव देते हैं।
आज शुक्रवार 21 अप्रैल को 5:50 बजे से पंचक का आरंभ हो गया है, जो 25 अप्रैल, मंगलवार 13:26 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता विशेषकर यात्रा, लेन-देन, व्यापार और बड़ी डील। अगर अनजाने में भी यह काम कर लिए जाएं तो आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अतिरिक्त 5 काम जो पंचक में नहीं करने चाहिए-
पंचक में चारपाई बनवाने से घर-परिवार पर बड़ा दुख आता है।
पंचक के समय घनिष्ठा नक्षत्र चल रहा हो तो उस समय में घास, लकड़ी और जलने वाली कोई भी चीज एकत्रित करके नहीं रखनी चाहिए इससे आग लगने का डर रहता है।
दक्षिण दिशा पर यम का अधिकार है जब पंचक चल रही हो तो दक्षिण दिशा में यात्रा न करें।
पंचक और रेवती नक्षत्र एक साथ चल रहे हो तो घर की छत न बनवाएं अन्यथा घर में धन का अभाव रहता है और पारिवारिक सदस्यों में मनमुटाव कभी समाप्त नहीं होता।
गरुड़ पुराण में कहा गया है जब किसी व्यक्ति की पंचक में मृत्यु होती है तो उसके साथ आटे या कुश के पांच पुतले बनाकर शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार करने से पंचक दोष समाप्त हो जाता है अन्यथा घर में पांच मौत होने का भय रहता है।
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