
इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने आज कहा कि दो भारतीय सैनिकों का सिर काटे जाने के बाद करीब 50 छात्रों को वापस स्वदेश भेजे जाने के मुद्दे को वह भारत के समक्ष उठाएगा।
साथ ही, इसने मूक दर्शक बने रहने को लेकर नई दिल्ली की आलोचना भी की। दिल्ली आधारित एनजीआे राउ्टस 2 रूट्स ने पाकिस्तानी छात्रों को अपने छात्र आदान प्रदान कार्यक्रम के तहत बुलाया था। इनकी मेजबानी के खिलाफ एनजीआे को सरकार की आेर से सलाह दिए जाने के बाद इन छात्रों को कल वापस भेज दिया गया। सरकार ने कहा कि नायब सूबेदार परमजीत सिंह और बीएसएफ के हेड कांस्टेबल प्रेम सागर की पाकिस्तान की बार्डर एक्शन टीम (बीएटी)द्वारा एक मई को सिर काटे जाने के बाद एेसे आदान प्रदान उचित नहीं हैं।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने छात्रों को वापस भेजे जाने को लेकर भारत के कट्टरपंथियों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि हिंदू चरमपंथी संगठन इसमें शामिल हैं जबकि सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। जकारिया ने कहा कि भारत में असिहष्णुता, चरमपंथ और आतंकवाद की बढ़ती घटनाओं ने दुनिया का ध्यान खींचा है। पाकिस्तान के प्रति भारत की बैरी नीति और मुसलमानों, ईसाइयों और तथा अन्य सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों के भारत में अभियोजन को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने चिंताजनक माना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत सरकार के समक्ष छात्रों की वापसी के मुद्दे को उठाएगा। उन्होंने कहा कि जब कभी जरूरत हुई है पाकिस्तान ने हमेशा ही चिंता जताई है।
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