
पेइचिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दक्षिण चीन सागर पर किए गए दावे पर चीन बुरी तरह भडक़ गया है। साथ ही चीन ने अमेरिका को उसकी संप्रभुता के लिए बड़ा खतरा करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कंग ने पेइचिंग में कहा, कभी-कभी कुछ देश फ्रीडम ऑफ नैविगेशन की आड़ में अपने विमानों और नौसैनिक बेड़ों को दक्षिण चीन सागर के नजदीक लाते हैं। वास्तव में, मुझे लगता है कि इस तरह के व्यवहार से दक्षिण चीन सागर से जुड़े देशों की संप्रभुता को खतरा होता है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन और एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशंस के प्रयासों की बदौलत समुद्र में हालात अब शांत हो रहे हैं। उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि इस स्थिति का संबंधित देश भी सम्मान करेंगे। ट्रंप की उस चेतावनी पर कि अगर नॉर्थ कोरिया अमेरिका या उसके सहयोगियों को खतरे में डालेगा तो वह उसे नेस्तनाबूद कर देंगे, प्रवक्ता ने कहा कि संयम दिखाने की जरूरती है। लु ने कहा कि पेइचिंग परमाणु मुद्दे को सही ट्रैक पर लाने और बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान की कोशिश का पक्षधर है।
आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले संबोधन में मंगलवार को अपनी उपलब्धियों का ढिंढोरा पीटा और उत्तर कोरिया के समूल नाश का संकल्प लिया।डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और चीन का बिना नाम लिए यूक्रेन और प्राकृतिक संपदा के लिहाज से समृद्ध दक्षिण चीन सागर की संप्रभुता पर खतरे की बात कही थी। ट्रंप ने कहा था, हमें कानूनों, सीमाओं और संस्कृति का हर हाल में सम्मान करना चाहिए।
कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ते संकट के बीच ट्रंप ने उत्तर कोरिया को धरती की मुसीबत करार दिया। इसके कुछ ही क्षण बाद उन्होंने उत्तर कोरिया का नाम लिया और उस देश में मानवाधिकार उल्लंघनों की एक सूची गिनाई। उत्तर कोरिया के परमाणु खतरे के बारे में उन्होंने प्योंगयांग की सरकार को दुष्ट और अपराधियों का गिरोह करार दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह इसपर और भी प्रतिबंध लगाए और इसे अलग-थलग कर दे। इसके साथ ही ट्रंप ने इस देश के समूल नाश की धमकी दी। उन्होंने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन को रॉकेट मैन करार दिया और कहा कि तानाशाह अपने परमाणु कार्यक्रम के साथ एक आत्मघाती मिशन पर है।
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