
बचपन उम्र का वह दौर है जिसमें हर कोई एक बार फिर दोबारा लौटना चाहता है। हर पल खुशियों का खजाना समेंटे हुए इस उम्र में न तो सुबह की फिक्र होती है और न ही शाम की चिंता। पानी से बनी कागज की किश्तियां भी मंजिल पर पहुंचने को बेताब रहती हैं। जब उम्र का दौर निकल जाता है तो हम लोग बचपन की बातों को बचपना समझ कर छोड़ देते हैं। अगर बच्चों की कुछ बातों से प्रेरणा ली जाए तो हम भी परेशानियों को आसानी से पार कर सकते हैं।
खिलखिलाती हुई हंसी
बचपन में बिना किसी बहाने से बच्चे हंसते-मुस्कुराते हैं। अपनी क्यूट सी बातों से दूसरों के चेहरे पर भी मुस्कुराहट ला देते हैं। आप भी अपनी भागदौड भरी जिंदगी से भी खुशी के पलों को गवाने की बजाए उन्हें जरूर जीएं।
छोड़ देें लोगों की फिक्र
बचपन में किसी भी बात की फिक्र नहीं होती। हर चीज को पूरी तमन्ना और दिल से पूरा करने का जज्बा होता है। इस बात की सीख आप बच्चों से ले सकते हैं। पहले अपने दिल की सुनें उसके बाद उस ख्वाहिश को पूरा करने की कोशिश करें।
खुलकर रोना
खुलकर हंसना और खुल कर रोना यह बात किसी बच्चे से ही सीखी जा सकती है। अपनी फीलिग्स को छुपाने की बजाए खुल कर बयां करना शुरू कर देंगे तो दिक्कतें भी अपने आप खत्म होनी शुरू हो जाएंगी।
बात दिल को न लगाना
बच्चे किसी भी बात को दिल से नहीं लगाते। एक पल में लड़ाई के बाद दूसरे ही पल दोस्ती करना उनकी मासूमियत ही है। इस आदत को बड़े भी अपना सकते हैं। किसी भी बात को दिल पर लेने से अच्छा है कि आप भी इसी तरह का फंड़ा अपनाएं और जिंदगी को हसीन तरीके से जीएं।
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