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CHANDRAYAAN 2 LAUNCH : चांद पर चला चंद्रयान-2, ISRO ने फिर रच दिया इतिहास


भारत का चांद पर जाने वाले चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) को ले जाने वाले जियोसिंक्रोनाइज सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल – मार्क तृतीय (जीएसएलवी – एमके तृतीय) को यहां स्थित प्रक्षेपण स्थल से सोमवार को नियत समय अपराह्न 2.43 बजे सफल प्रक्षेपण हो गया।
चंद्रयान-2 अभी शुरुआती दौर में हैं। ISRO की तरफ से कहा गया है कि अभी रॉकेट की गति बिल्कुल सामान्य है यानी अभी ये यान इसरो की प्लानिंग के हिसाब से ही चल रहा है। चंद्रयान-2 48 दिनों के बाद चांद पर पहुंच जाएगा। चांद और पृथ्वी के बीच की दूरी 3, 84, 000 किलोमीटर है।
इसरो चीफ के सिवन ने बताया कि जीएसलवी मार्क-3 के जरिए चंद्रयान-2 की सफलता पूर्वक लॉन्चिंग हुई। चांद की तरफ भारत की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत हुई। हमने चंद्रयान-2 की तकनीकी दिक्कत दूर कर इस मिशन को अंतरिक्ष में भेजा। हमारी सोच से भी बहुत अच्छी लॉन्चिंग हुई है। हमने तकनीकी दिक्कत की जांच कर तुरंत इसे दूर किया था। टीम इसरो के इंजिनियर, टेक्निकल स्टाफ की कठोर मेहनत से ही हम यहां पहुंचे हैं। टीम इसरो ने अपना घर-परिवार छोड़कर पिछले 7 दिनों में चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग के लिए दिन-रात एक कर दिया।यह तीन सैटलाइट मिशन है। लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान चांद की सतह पर उतरेंगे।
– चंद्रयान 2 की लॉन्चिंग में अब महज ढाई घंटे से भी कम का समय बाकी है। इसरो ने ट्वीट कर जानकारी दी कि चंद्रयान 2 में लिक्विड ऑक्सीजन की फिलिंग शुरू कर दी है।
अब तक का सबसे शक्तिशाली लॉन्चर…
GSLV Mk-III भारत का अब तक का सबसे शक्तिशाली लॉन्चर है। इसे पूरी तरह से देश में ही बनाया गया है। तीन स्टेज का यह रॉकेट 4 हजार किलो के उपग्रह को 35,786 किमी से लेकर 42,164 किमी की ऊंचाई पर स्थित जियोसिनक्रोनस ऑर्बिट में पहुंचा सकता है। 10 हजार किलो के उपग्रह को 160 से 2000 किमी की लो अर्थ ऑर्बिट में पंहुचा सकता है। इस रॉकेट के माध्यम से 5 जून 2017 को जीसेट-19 और 14 नवंबर 2018 को जीसेट-29 का सफल प्रक्षेपण किया गया है। ऐसी उम्मीद है कि इसरो के मानव मिशन गगनयान को इसी रॉकेट के अत्याधुनिक अवतार से भेजा जाएगा।
इसरो ने बताया कि जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (जीएसएलवी मार्क-3) में आई तकनीकी खराबी को ठीक कर लिया गया है।बाद में इसरो ने अपने 44 मीटर लंबे जियोसिनक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हीकल-मार्क-3 (जीएसएलवी-एमके-3) की गड़बड़ी दूर की। 640 टन वजनदार जीएसएलवी-एमके-3 को बाहुबली फिल्म के नायक के नाम पर बाहुबली का उपनाम दिया गया है।
फिल्म का नायक जिस तरह एक दृश्य में भारी लिंगम (शिवलिंग) को उठाता है उसी प्रकार यह रॉकेट 3.8 टन वजनी चंद्रयान-2 को ले गया। जीएसएलवी-एमके-3 रॉकेट की लागत 375 करोड़ रुपए है जबकि चंद्रयान-2 की लागत 603 करोड़ रुपए है। यह रॉकेट अपनी करीब 16 मिनट की उड़ान के दौरान चंद्रयान-2 को इसकी 170 गुणा 40400 किलोमीटर की कक्षा में प्रक्षेपित करेगा।