
वाशिंगटन: भारत की संसद में हाल में वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) विधेयक का पारित होना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी विधायी उपलब्धि है और इस बात को उनके बड़े आलोचक भी नहीं झुठला सकते हैं। एक प्रमुख विशेषज्ञ ने यह बात कही है।
अनुसंधान संगठन कारनेगी एंडावमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के मिलान वैष्णव ने विदेश मामलों की पत्रिका में लिखा है, ‘‘मोदी सरकार जो कि इस आलोचना से हैरान थी कि उसने भारतीय अर्थव्यवस्था के स्वरूप में बदलाव के लिए कुछ खास नहीं किया है, अब उसे एक कानून पारित करने पर सराहना मिल रही है और यह उसकी एेसी उपलब्धि है जिसे उसके कड़े विरोधी भी आसानी से खारिज नहीं कर सकते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह उपलब्धि उनकी सरकार के लिए सही समय पर आई है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान पहले ही शुरू हो चुका है। उत्तर प्रदेश की जनसंख्या 20 करोड़ के करीब है। उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में चुनावों का समय और उसकी अहमियत को देखते हुए कई इन चुनावों को मोदी सरकार को लेकर मध्यावधि जनमत भी करार दे सकते हैं।’’
विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी के लागू होने से एक एेसी साझी कर प्रणाली अमल में आ जाएगी जिससे राज्यों और केन्द्र के स्तर पर अप्रत्यक्ष करों की मौजूदा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकेगा। केंद्र के स्तर पर लगने वाले उत्पाद शुल्क और राज्य के स्तर पर लगने वाले मूल्य वर्धित कर, प्रवेश कर और विलासिता कर जैसे कई करों को इसमें समाहित कर दिया जाएगा।
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