
सेल्सफोर्स इंडिया की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अरुंधति भट्टाचार्य ने बृहस्पतिवार को कहा कि, विभिन्न कंपनियों के ‘घर से काम’ को अपनाने से कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि, यह तरीका महिलाओं को घर और काम दोनों संभालने की सहूलियत देता है। भट्टाचार्य ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2020 को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी ने न सिर्फ इस धारणा को बदला है कि ‘घर से काम’ प्रभावी नहीं होता, बल्कि इससे कार्यस्थल का स्वरूप भी बदल रहा है।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की पूर्व चेयरमैन ने कहा कि भारत में वास्तव में कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी कम हो रही है, लेकिन देश में अच्छी तरह से प्रशिक्षित महिलाओं की काफी संख्या है। ये महिलाएं घरों में बैठी हैं क्योंकि ये घर को संभालने में मुख्य होने के कारण बाहर नहीं निकल पाती हैं। उन्होंने कहा कि, जब महिलाएं घर का देखभाल करने के लिये अपनी नौकरी छोड़ देती हैं, तो उनके लिये वापस आना अक्सर मुश्किल होता है। यहां तक कि जब वे कार्यबल में फिर से शामिल होती हैं, तो वे अपने उन साथियों की तुलना में नीचे रह जाती हैं, जो करियर में आगे बढ़ चुके हैं।
अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘अत: मुझे लगता है कि इस स्थिति ने जो लचीलापन बनाया है, वह वास्तव में हम सभी के लिये बहुत अच्छा है।” भट्टाचार्य ने कहा, ऐसी धारणा रही है कि लोगों को घर से काम करने की अनुमति बहुत उत्पादक नहीं होगी। उन्होंने कहा, “हालांकि, लॉकडाउन ने जबरदस्ती उस प्रयोग को अंजाम दिया है और हमें दिखाया है कि घर से काम भी उतना ही उत्पादक हो सकता है … इसने न सिर्फ लोगों के काम करने के तरीके को बदला है, बल्कि इसने कार्यस्थल के बारे में हमारे विचारों में भी बदलाव लाया है।” वर्तमान स्थिति का बैंकों के भविष्य पर पड़ने वाले असर के बारे में भट्टाचार्य ने कहा कि आने वाले समय में कार्यस्थल अलग दिखने लगेंगे। उन्होंने कहा, “ऑफलाइन उपस्थिति अभी भी बनी रहेगी, क्योंकि लोग ऐसे बैंक पर भरोसा करते हैं जिसे वे आसानी से देख पाते हो। लेकिन ऑफलाइन उपस्थिति का महत्व कम होगा। ग्राहक घर में आरात से बैठकर बैंक की सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं और सारे लेन-देन कर सकते हैं।”
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