
टोक्यो के ओलंपिक स्टेडियम के फास्ट ट्रैक के बारे में सभी भविष्यवाणियां सही साबित हो रही है। और इस ट्रैक पर रोज नए रिकार्ड स्थापित हो रहे हैं। लाल रंग के इस ट्रेक पर पांचवें दिन की सुबह तक दो ओलंपिक और दो वर्ल्ड रिकार्ड दे चुका है। पुरुषों की 400 मीटर हर्डल्स के फाइनल में नार्वे के कार्स्टन वारहोम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अपने ही वर्ल्ड रिकार्ड को ध्वस्त कर दिया। फाइनल में छठी लेन में दौड़ते हुए वारहोम ने सबसे तेज शुरुआत की और उनका रिएक्शन टाइम 0.145 सैकंड का था जो सभी 8 एथलीटों में सबसे कम था। इसके बाद अपने 400 मीटर के सफर के दौरान फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा। ऐसा लग रहा था मानो हर्डल्स नहीं बल्कि 400 मीटर की सामान्य रेस हो और 45.94 सैकंड में ही सबसे पहले अपनी मंजिल तक पहुंच गए। इसी के साथ उन्होंने ना केवल स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया बल्कि ओस्लो डायमंड लीग में खुद का बनाया हुआ 46.70 सैकंड का वर्ल्ड रिकार्ड तोड़ दिया। पिछले दो महीने में ये दूसरा मौका है जब वारहोम ने वर्ल्ड रिकार्ड तोड़ा है।
माना जा रहा था कि वॉरहोम को अगर कोई खिलाड़ी टक्कर दे सकता है तो वो हैं अमेरिका के रॉय बैंजामिन लेकिन बैंजामिन भी वारहोम के बेहतरीन प्रदर्शन के आगे फीके ही रहे। बैंजामिन ने 46.17 सैकंड का समय लेते हुए रजत पदक हासिल किया। वहीं ब्राजील के एलीसन सैंटोस ने 46.72 सैकंड का समय लेते हुए कांस्य पदक जीता।
अमेरिकी ओलंपिक ट्रायल के दौरान बैंजामिन ने 46.83 सैकंड का समय लिया था, जो कि इस ईवेंट के इतिहास में तीसरा सबसे तेज समय था। वारहोम के पहले 400 मीटर हर्डल्स का विश्व रिकार्ड 1992 के बार्सिलोना ओलंपिक के दौरान अमेरिका के केविन यंग के नाम था जिन्होंने 46.78 सैकंड का समय लिया था।
टोक्यो में अब तक 15 गोल्ड मैडल का फैसला हो चुका है और खआस बात ये ही कि सभी 15 स्वर्ण पदक अलग-अलग देशों के नाम गए हैं यानी एक समय में अमेरिका और जमैका के दबदबे वाले एथलेटिक ईवेंट्स में इस बार हर देश का एथलीट अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहा है और उसका सबसे बड़ा कारण ट्रैक की रफ्तार और टोक्यो का गर्म मौसम माना जा रहा है ।
लेख : विवेक शर्मा
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