
जापान की राजधानी टोक्यो में खेले जा रहे 32वें ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों का समापन रविवार 8 अगस्त को हो गया। कुल 340 स्वर्ण पदकों के लिए खेल रहे दुनिया भर से आए 10,000 से ज्यादा एथलीटों ने समापन समारोह में टोक्यो को ‘सायोनारा’ बोल दिया और सभी खिलाड़ी पेरिस को ‘बोन्ज़्युर’ बोल रहे हैं। कारण है, अपने तय समय से एक साल बाद आयोजित किए गए टोक्यो 2020 के बाद अब एथलीटों और खेल प्रेमियों को इंतज़ार है फ्रांस की राजधानी पेरिस में होने वाले 33 वें ओलंपिक खेलों का जो तीन साल बाद 2024 में आयोजित किए जाएंगें।
ओलंपिक इतिहास पर नज़र दौड़ाएं तो 1896 से हुई आधुनिक खेलों की शुरुआत से अब तक कुल 32 शहरों में इनका आयोजन हो चुका है। और एशिया को अब तक कुल 4 बार खेलों के इस महाकुंभ का आयोजन करने का मौका मिला है। एशिया में ओलंपिक खेलों का सबसे पहले आयोजन 1964 में जापान की राजधानी टोक्यो में ही हुआ था । इसके बाद दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल खेलों का आयोजन 1988 में किया गया। इसके बाद 2008 में चीन की राजधानी बीजिंग में खेलों का आयोजन हुआ था। ये दूसरा मौका है जब टोक्यो को ओलंपिक खेलों के आयोजन का मौका मिला है।
वर्ष 2024 के ओलंपिक खेलों के लिए मेजबान बनने जा रहा पेरिस भी अब तीसरी बार अपने शहर में ओलंपिक खेलों को आयोजित करेगा। इसके पहले साल 1900 और 1924 में पेरिस खेलों की मेजबानी कर चुका है। दुनिया के नक्शे पर नज़र दौड़ाएं तो अब तक सिर्फ लंदन ही ऐसा शहर रहा है जहां पर तीन बार ओलपिक खेलों हुए हैं। लंदन ने 1908, 1948 और 2012 में ओलंपिक खेलों का आयोजन किया है। एशिया पैसेफिक में वर्ष 2000 में ऑस्ट्रेलिया की राजधानी सिडनी में मेजबानी की है जबकि 2032 में ब्रिस्बेन 35 वें खेलों का आयोजन करेगा।
टोक्यो 2020 में स्वर्ण (340), रजत(338) और कांस्य (402) पदक मिलाकर कुल 1080 पदक दांव पर थे यानी ओलंपिक में शामिल होने वाले 206 देशों के 11,090 खिलाड़ियों में से सिर्फ 1000 से कुछ ज्यादा ही एथलीटों को ही कामयाबी मिली क्योंकि कुछ एथलीटों ने एक से ज्यादा पदक भी जीते। लेकिन ओलंपिक की भावना पर गौर करें तो जीतना उतना जरूरी नहीं जितना इन खेलों में हिस्सेदारी और वो भी सभी एक-साथ। टोक्यो में ऐसे कुछ खिलाड़ी रहे जिन्होंने अपने बेहतरीन प्रदर्शन और एक से अधिक पदक जीतकर वजह से इतिहास में अपना नाम अमर कर लिया, उनमें जमैका की धाविका इलेन थॉमसन हेराह, इटली के धावक मार्सेल जैकब, चीन के टेबल टेनिस खिलाड़ी मा लौंग, दक्षिण कोरिया की तीरंदाज आन सुन, ग्रेट ब्रिटेन के डाइवर टॉम डैली, नीदरलैंड की मध्यम दूरी की धाविका सिफान हसन, जापान के जिमनास्ट दाइकी हाशिमोतो, अमेरिका के तैराक सेलेब ड्रेसल, ऑस्ट्रेलिया की तैराक एम्मा मैक्यिऑन और केन्या के मैराथन रनर एलियुड किपचोगे शामिल रहे। एशियाई देशों के प्रभावी और शानदार प्रदर्शन की बात करें तो फिलिपिंस ने पहली बार ओलंपिक का स्वर्ण पदक वेटलिफ्टिंग में जीता जबकि भारत और चीन ने पहली बार एथलेटिक्स के जेवेलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीता ।
लेख : विवेक शर्मा
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