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भारत ने 19 साल पहले की थी नीदरलैंड्स को हल्के में लेने की भूल, अब नहीं दोहराना चाहेगा ‘वो’ गलती


मैदान साउथ अफ्रीका का बोलैंड पार्क। वर्ल्ड कप में भारतीय टीम प्रबल दावेदार के रूप में उतरी थी। टीम के पास सचिन तेंदुलकर से लेकर राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली जैसे स्टार खिलाड़ी थे। इसका साथ देने के लिए युवराज सिंह, मोहम्मद कैफ और वीरेंद्र सहवाग का युवा जोश भी था। टूर्नामेंट के पहले मुकाबला में भारत की टक्कर थी नीदरलैंड्स से। इंटरनेशनल क्रिकेट में पहला ही मौका था, जब दोनों टीमों की टक्कर हुई।
पहले खेलने उतरी टीम इंडिया : भारत के लिए नीदरलैंड्स की चुनौती आसान मानी जा रही थी, लेकिन मुकाबला शुरू होते ही कहानी पलट गई। सौरव गांगुली शुरुआत से ही पिच पर जूझने लगे और 32 गेंदों पर 8 रन बनाकर आउट हुए। वीरेंद्र सहवाग सिर्फ 6 रन बना सके। राहुल द्रविड़ के बल्ले से 17 रन ही निकले, वो भी 38 गेंदों पर। सचिन तेंदुलकर ने एक छोर संभालकर फिफ्टी लगाई लेकिन वो भी 52 रन बनाकर आउट हो गए।
7वें नंबर पर उतरे दिनेश मोंगिया ने 42 और युवराज सिंह ने 37 रन बनाकर किसी तरह टीम का स्कोर 200 रनों के पार पहुंचा दिया। 49वें ओवर में भारत की पारी 204 रनों पर सिमट गई। नीदरलैंड्स के लिए तेज गेंदबाज टिम डे लीड ने 4 विकेट झटके। लाहौर में जन्मे आदिल रजा ने 2 बल्लेबाजों को आउट किया।
श्रीनाथ और कुंबले बने थे संकटमोचन : 205 रनों का लक्ष्य मिलने के बाद नीदरलैंड्स को जीत की खुशबू आने लगी थी, लेकिन बीच में आ गए जवागत श्रीनाथ और अनिल कुंबले। नीदरलैंड्स के टॉप-8 बल्लेबाजों में डैन वान बुंग ने 62 रनों की पारी खेली। लेकिन उनके अलावा 7 बल्लेबाज मिलकर सिर्फ 7 रन ही बना सके। 54 के स्कोर पर उनके 7 बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे।
9वें नंबर पर उतरे एडगर शिफर्ली ने 13 और 10वें नंबर पर उतरे जेरोइन स्मिट्स ने 26 रन बनाकर टीम को 136 रनों तक पहुंचा दिया। भारत ने भले ही 68 रनों से जीत हासिल की लेकिन दिल नीदरलैंड्स जीत गया। इसके बाद 2011 वर्ल्ड कप में भी भारत और नीदरलैंड्स की टक्कर हुई थी। वहां भी 190 रन का लक्ष्य हासिल करने में भारत ने 5 विकेट खो दिए थे।