
तेलुगू, मलयालम के साथ हिंदी सिनेमा में वेब सीरीज ‘काठमांडू कनेक्शन सीजन-2’, ‘जामताड़ा’ में काम कर चुकीं एक्ट्रेस अक्षा परदासनी बीते दिनों कॉमिडी फिल्म ‘शुभ निकाह’ में मुख्य किरदार निभाते हुए नजर आई थीं। बीते दिनों वह लखनऊ आईं तो उन्होंने साउथ वर्सेज बॉलिवुड, ओटीटी, फिल्म इंडस्ट्री के ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर विचार रखें।
‘जामताड़ा’ ने मुझे पहचान दी – मैं मुंबई से ताल्लुक रखती हूं। बचपन से हर किसी का सपना होता है कि वो डॉक्टर, इंजिनियर बने, उसी तरह मेरा सपना था ऐक्टर बनने का। जब घर में मेहमान आते थे तो मैं उनके सामने मिमिक्री और डांस करती थी। जैसे-जैसे बड़ी हुई मेरा शौक पैशन में बदल गया। मैंने साउथ में कई फिल्में कीं लेकिन मुझे पहचान वेब सीरीज ‘जामताड़ा’ से मिली। इसने दर्शकों के बीच मेरे चेहरे और काम दोनों को ही पहचान दिलाई। उसी का नतीजा है कि आज मुझे अच्छा काम मिल रहा है।
नियम से चलती है साउथ इंडस्ट्री – अक्सर लोग सवाल करते हैं कि साउथ और बॉलिवुड में काम करने के तरीके में क्या अंतर है? मुझे बस एक अंतर नजर आया और वो शायद काफी बड़ा है। साउथ में अनुशासन बहुत है। अगर वहां शूट का टाइम 7 बजे है तो फिर चाहे जितना बड़ा स्टार क्यों ना हो, वह सेट पर 7 बजे से पहले ही पहुंच जाएगा। वहां पर समय की बहुत अहमियत है। अनुशासन के मामले में बॉलिवुड उससे पीछे है। यहां पर लेट-लतीफी चलती है लेकिन मेरा दोनों इंडस्ट्रीज में काम करने का अनुभव अच्छा रहा।
ओटीटी हम कलाकारों के लिए वरदान – आज ओटीटी की पहुंच लगभग हर दर्शक तक है। फिर चाहे वो टेलिविजन, फिल्मों का ही दर्शक क्यों ना हो। ओटीटी का मार्केट इतना बड़ा हो गया कि हर कोई उसकी तरफ खिंचा जा रहा है। पहले टीवी और फिल्मों का दौर था और हम जैसे न्यू कमर और बाहर से आए लोगों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ता था। जब से ओटीटी आया है, हम जैसों को मानो वरदान मिल गया हो। खूब काम और अच्छे रोल मिल रहे। सबसे बड़ी बात है कि इतना बड़ा मंच मिल रहा, जिसकी कल्पना करना मुश्किल है।
क्रिएटिविटी का दायरा बढ़ा है – फिल्मों में सेंसरशिप काम करती है इसलिए वहां सीमित होकर काम करना पड़ता है लेकिन ओटीटी फ्री है। मेरा मानना है कि सेंसरशिप न होने की वजह से क्रिएटिविटी का दायरा बढ़ जाता है। कलाकार, डायरेक्टर यहां तक कि राइटर के लिए भी ओटीटी एक खुला मैदान है। जहां चाहो बैटिंग करो इसलिए यहां सभी को एक्सप्लोर करने का भरपूर मौका मिल रहा है।
500 रुपये के टिकट महंगे लगते – कोविड ने बहुत कुछ बदल दिया है। अब थिएटर जाने से पहले लोग सोचने लगे हैं क्योंकि अब ओटीटी पर 500 रुपये में कई चैनल व एंटरटेनमेंट प्लैटफॉर्म सब्सक्राइब हो जाते हैं। थिएटर में दो लोग मूवी देखने जाएं तो 500 से ज्यादा खर्च हो जाते हैं। ऐसे में लोग 15 दिन इंतजार कर लेते हैं कि अंत में मूवी ओटीटी पर आ ही जाएगी, तभी देख लेंगे। थिएटर तक दर्शकों को लाना एक चुनौती है। फिलहाल, पठान की सफलता ने उम्मीद जगा दी है। आने वाली फिल्मों के लिए यह शुभ संकेत है।
मनीष पॉल के साथ है प्रॉजेक्ट – मेरे पास 2-3 प्रॉजेक्ट हैं। इनमें एक वेब सीरीज और दो फिल्में है। ऐक्टर और कॉमिडियन मनीष पॉल के साथ मेरी एक वेब सीरीज है, जो जल्द रिलीज होगी। श्रेयस तलपड़े के साथ एक फिल्म की शूटिंग की है। एक प्रोजेक्ट और है, उसके बारे में ज्यादा बता नहीं सकती लेकिन जल्द ही उसकी भी शूटिंग होने वाली है।
आ चुकी हूं लखनऊ – वेब सीरीज काठमांडू कनेक्शन की शूटिंग के लिए मैं लखनऊ आई थी, तब काफी समय बिताया था। खूब घूमी भी थी। कभी लगा नहीं कि दूसरे शहर में हूं। यहां मुझे अपने घर जैसी फीलिंग आई। यहां की तहजीब और लोगों के बातचीत का अंदाज अच्छा है। वहीं, खाने के तो क्या ही कहने। ऐसा लजीज फूड लखनऊ के अलावा कहीं मिल ही नहीं सकता है।
जोया का किरदार मेरी तरह है- फिल्म के डायरेक्टर से मेरी तीन साल पहले मुलाकात हुई थी पर जब वो यह फिल्म बनाने जा रहे थे तो सबसे पहले मुझे कॉल की और रोल के बारे में बताया। स्क्रिप्ट सुनने के बाद मेरी हंसी नहीं रुकी। यह किरदार जहां बहुत बहादुर है, वहीं हंसमुख भी। फिल्म शुभ निकाह में मैं एक मुस्लिम लड़की जोया बनी हूं। सच बताऊं तो यह बिलकुल मेरी रियल लाइफ की तरह है क्योंकि मैं भी बहुत स्ट्रॉन्ग हूं।
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