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​बच्‍चे को काबिल बनाने के लिए उसे हारना सिखाएं, डांटने-मारने की बजाए ऐसे करें मोटिवेट

आपने कई बार लोगों को कहते सुना होगा कि असफलता के बाद ही सफलता मिलती है। फिर भी हम बच्‍चे की असफलता पर विपरीत प्रतिक्रिया क्यों देते हैं। हमारी इस आदत की वजह से बच्‍चा कभी हार का सामना करना नहीं सीख पाता। बता दें कि सफलता की तरह जीवन में असफल होना बहुत जरूरी है। क्‍योंकि इससे बच्‍चों को पता चलता है कि कहां कमजोर हैं और कहां सुधार की गुंजाइश है।
बच्‍चों को सिखाएं कि अच्‍छे अंक लाने के बजाय सीखने का लक्ष्‍य रखना चाहिए। बच्‍चे को काबिल इंसान बनाना है, तो माता-पिता के तौर पर आपको असफलता सिखाने में भी उनकी मदद करनी होगी। क्‍योंकि असफलता कुछ नया सिखाती है और यही सफलता की पहली सीढ़ी भी है। तभी तो दूसरे प्रयास में जो गलतियां होती हैं , बच्‍चे उन्हें तीसरी बार नहीं करते और सीधे सफलता का रास्‍ता तय कर लेते हैं। यहां बताया गया है कि हम कैसे अपने बच्‍चों को दबावों और असफलताओं से निपटना सिखा सकते हैं।
असफलताओं से लड़ना सिखाएं – जो माता-पिता कठिनाओं और गलतियों को लेकर पॉजीटिव एटीट्यूड अपनाते हैं, उनके बच्‍चे सीखने का आनंद लेते हैं। माता-पिता के तौर पर उन तरीकों पर जोर दें, जो सफलता के लिए जरूरी हैं। असफलता वह लॉन्च पैड हो सकती है, जहां से बच्चा सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
​हार को स्‍वीकारना सिखाएं – कुछ माता-पिता बचपन से ही बच्‍चे को सफलता का पाठ पढ़ाने लगते हैं। ऐसे बच्‍चे शुरूआती जीवन में असफल भले ही ना हो, लेकिन आगे चलकर जब उन्‍हें असफलता मिलती है, तो वे इस हार को आसानी से स्‍वीकार नहीं पाते।
इसलिए बच्‍चों के मन में हार या जीत जैसी किसी भी चीज को बढ़ावा न दें। हां, आप उन्‍हें अपनी असफलताओं की कहानी सुना सकते हैं। आपने उससे कैसे जीत हासिल की यह उन्‍हें बताएं। आपकी इस कहानी से बच्‍चे मोटिवेट होंगे और नई चीज को आजमाना चाहेंगे बिना सोचे कि इसमें उनकी जीत होगी या हार।
उनके शौक का हिस्‍सा बनें – आप बच्‍चों के साथ कुछ ऐसा कर सकते हैं, जिसमें आपके बच्चे को इंटरेस्ट हो। आप उनके साथ पेंट करें, गुड़िया या घर सजाएं। बच्‍चे आपको ऐसा करते देखेंगे, तो वह जानेंगे कि सीखने की न कोई उम्र होती है और न हीं कोई सीमा। सीखने की इस आदत को अपनाने से उन्‍हें अपनी स्किल को और निखारने में मदद मिलेगी।
ताकत का परिचय कराएं – माता-पिता के रूप में हमारी जिम्‍मेदारी है कि बच्‍चों को उनकी ताकत का अहसास दिलाएं। इससे उन्‍हें जीवन की शुरुआत में ही अपना लक्ष्य तय करने में आसानी होगी। छोटी सी उम्र में ही वे सीख जाएंगे कि सफलता के लिए हार जरूरी थी। किसी चीज में असफल होने के बाद ही आप उसमें सुधार कर सकते हैं। बस बच्‍चे को हमेशा माता-पिता का सपोर्ट और उनकी तारीफ चाहिए, जो आप उन्‍हें दे सकते हैं।
​असफलता से उबरने दें – माता-पिता हमेशा बच्‍चे के सपोर्टर होते हैं। लेकिन किसी मो़ड़ पर बच्‍चा का सामना हार से हुआ है, तो उसे खुद इस स्थिति से उबरने दें । आपका कर्तव्‍य बस उसे प्रोत्साहित करना और मार्गदर्शन देना है। जब तक हम किसी चीज का मुकाबला अकेले नहीं करते, तब तक हमें अहसास नहीं होता कि हममें इस चीज का मुकाबलना करने की कितनी ताकत है। इसलिए उन्हें अकेले हार का सामना करने दें। जरूरत पड़ने पर उसके साथ खड़े रहें।