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गर्भावस्‍था में आयरन डेफिशियंसी एनीमिया को कंट्रोल


गर्भावस्‍था में आयरन डेफिशियंसी एनीमिया को कंट्रोलगर्भावस्‍था से लेकर कंसीव करने की कोशिश कर रही महिलाओं और डिलीवरी के बाद तक महिलाओं को आयरन की बेहद जरूरत होती है। अगर इस दौरान महिलाओं में आयरन डेफिशियंसी एनीमिया (Iron Deficiency Anemia) का खतरा हो तो डॉक्‍टर को शरीर में आयरन के स्‍तर को लगातार मॉनिटर करना पड़ता है। आपको बता दें कि आयरन डेफिशियंसी यानी आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया सबसे आम है।
​आयरन की कमी से एनीमिया क्‍या होता है
आयरन डेफिशियंसी एनीमिया एक मेडिकल स्थिति है जो कि शरीर में आयरन का स्‍तर घटने की वजह से होती है। जब शरीर पर्याप्‍त मात्रा में लाल रक्‍त कोशिकाओं का निर्माण नहीं कर पाता है, तब एनी‍मिया की स्थिति उत्‍पन्‍न होती है। यदि लाल रक्‍त कोशिकाएं ठीक तरह से कार्य न कर पाएं, तो भी एनीमिया हो सकता है।
​आयरन डेफिशियंसी एनीमिया के लक्षण
आयरन का स्‍तर कम होने पर आपको नीचे बताए गए लक्षण दिख सकते हैं :
थकान
हाथ-पैर ठंडे होना
चक्‍कर आना
सीने में दर्द
नाखूनों का पीला पड़ना
दिल की धड़कन अनियमित होना
सिरदर्द
शरीर का तापमान कम होना
सांस फूलना
यदि आपका शरीर बाकी हिस्‍सों तक ऑक्‍सीजन पहुंचाने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में हीमोग्‍लोबिन नहीं बना पा रहा है तो आपको ऊपर बताए गए एक या उससे ज्‍यादा लक्षण दिख सकते हैं।
आमतौर पर कम मात्रा में आयरन के सेवन से आयरन डेफिशियंसी एनीमिया होता है। यदि आप आयरनयुक्‍त आहार या सप्‍लीमेंट नहीं लेते हैं या खून बहने या सिलिएक या क्रोन डिजीज के कारण ऐसा हो सकता है। इन स्थितियों में शरीर को भोजन से आयरन को अवशोषित करने में दिक्‍कत होती है।
इसके अलावा आयरन डेफिशियंसी एनीमिया पुरुषों से ज्‍यादा महिलाओं को प्रभावित करता है और गर्भधारण करने या गर्भवती महिलाओं को इसका खतरा ज्‍यादा रहता है। गर्भावस्‍था में सामान्‍य विकास के लिए अत्‍यधिक आयरन की जरूरत होती है, खासतौर पर प्रेग्‍नेंसी के दूसरे हिस्‍से में।
​प्रेग्‍नेंसी से पहले कैसे करें कंट्रोल
अगर प्रेग्‍नेंसी से पहले एनीमिया का निदान हो तो सबसे पहले आपको ये पता लगाना चाहिए कि आपको किस प्रकार का एनीमिया हुआ है।विटामन बी12 की कमी या फोलेट की कमी और लाल रक्‍त कोशिकाओं में गड़बड़ी जैसे कि सिकेल सेल या थैलेसीमिया जैसे कारणों से एनीमिया होने का पता लगाने के लिए डॉक्‍टर टेस्‍ट कर सकते हैं।
पीरियड्स के दौरान ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने की वजह से भी फर्टिलिटी उम्र में महिलाओं में आयरन डेफिशियंसी एनीमिया हो सकता है। गर्भावस्‍था से पहले एनीमिया का इलाज वहीं है जो प्रेग्‍नेंसी में एनीमिया का होता है। इसमें आयरन युक्‍त आहार और आयरन के सप्‍लीमेंट से इलाज किया जाता है। जिन महिलाओं को माहवारी के दौरान ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने पर आपको गायनेकोलोजिस्‍ट से परामर्श अवश्‍य करना चाहिए।
​गर्भावस्‍था में एनीमिया कैसे करें नियंत्रित
प्रेग्‍नेंसी से पहले दिए जाने वाले विटामिनों (प्रीनैटल विटामिन) में आयरन होता है। आयरन युक्‍त प्रीनैटल विटामिन गर्भावस्‍था के दौरान आयरन डेफिशियंसी एनीमिया के इलाज और उसे रोकने में मदद कर सकता है। कुछ मामलों में डॉक्‍टर अगल से आयरल सप्‍लीमेंट लेने के लिए कह सकते हैं। गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं को प्रतिदिन 27 मि.ग्रा आयरन की जरूरत होती है।
गर्भावस्‍था के दौरान सही पोषण लेकर भी आयरन डेफिशियंसी एनीमिया से बचा जा सकता है। रेड मीट, अंडा और मछली आयरन के बेहतरीन स्रोत होते हैं। इसके अलावा आप मटर, बींस और अनाज से भी आयरन ले सकती हैं।
भोजन से प्राप्‍त आयरन के शरीर में अवशोषण को बढ़ाने के लिए उच्‍च विटामिन सी खाद्य एवं पेय पदार्थों का सेवन करें। इसमें संतरे का जूस, टमाटर का जूस और स्‍ट्रॉबेरी शामिल हैं।
​डिलीवरी के बाद कैसे करें कंट्रोल
डिलीवरी के बाद और प्रसव के पहले कुछ हफ्तों एवं महीनों में कई महिलाओं में आयरन डेफिशियंसी एनीमिया के लक्षणों में सुधार देखा जाता है। डिलीवरी के बाद अक्‍सर आयरन डेफिशियंसी एनीमिया कम हो जाता है क्‍योंकि इस दौरान स्‍तनपान के कारण मासिक धर्म की ब्‍लीडिंग कम हो जाती है।
वहीं कुछ महिलाओं को डिलीवरी के बाद भी आयरन डेफिशियंसी एनीमिया की समस्‍या बनी रह सकती है। ऐसा गर्भावस्‍था के दौरान पर्याप्‍त आयरन न लेने और डिलीवरी के दौरान ज्‍यादा खून बहने की वजह से होता है। डिलीवरी के बाद एनीमिया से चिंता, तनाव और डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।
इस दौरान महिलाओं को एनर्जी बनाए रखने के लिए आयरन के सप्‍लीमेंट लेने चाहिए। अपने आहार में आयरन और विटामिन-सी युक्‍त चीजों को शामिल करें।
इस तरह फर्टिलिटी की उम्र की महिलाएं आयरन डेफिशियंसी एनीमिया से बच सकती है और समय पर इसका इलाज करवा अपनी और अपने शिशु की रक्षा कर सकती हैं।