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बिना आग के कुकर से खाना पका कर पैसा, ईंधन और पर्यावरण बचाइए

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दोआला: क्या एक बैग जलवायु परिवर्तन से लड़ने में हमारी सहायता कर सकता है? कई कैमरून गृहणियां इस सोच के साथ अपनी पसंद के चावल टमाटर जैसे लजीज पकवान बना रहीं हैं। बिना ईंधन का या बिना आग का ये ‘कुकर’ एक बैग जैसा दिखता है और अलग अलग परंपरागत रंगों और छपाई में मिलता है।

बहुत ही सरल सिद्धांत पर काम करता है ये बैग
इसके काम करने का बहुत ही सरल सिद्धांत है। ये गर्मी को रोके रखता है। पॉलीस्टीरीन और कपड़े से बने इस ‘कुकर’ की कीमत 10000 से 20000 सीएफए फ्रैंक (17 से 34 डॉलर) के बीच है जिसे एक एनजीओ बना कर बेच रही है। ये संस्था देश की 30 लाख आबादी वाली अति प्रदूषित आर्थिक राजधानी दोआला में जरूरतमंदों की मदद करती है।

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बहुत फायदे है इस बैग के
इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये बहुत लंबा चलता है। एनजीओ को चलानेवाली कैथरीन ल्यूग का कहना है कि लोगों के पैसे की बचत के अलावा ये ईंधन, लकड़ी, कार्बन और पेट्रोल भी बचाता है। हम अपने ही तरीके से पर्यावरण का बचाव कर रहे है क्योंकि ये कुकर बैग धुंआ नहीं निकालते।
बेंचों पर प्याज, गाजर काटते हुए, पत्तियां मसाले डालते हुए यहां की महिलाओं को चावल टमाटर पकाते देखा जा सकता है। इससे पहले मसालों को लकड़ी के चूल्हे या गैस स्टोव पर परंपरागत बर्तनों में पकाया जाता था। ल्यूग ने बताया कि जब सब्जियां उबलने लगतीं हैं तब पांच बैग चावल और पांच बैग पानी के साथ मसाले डाले जाते हैं। पर्याप्त पानी डालना जरूरी है क्योंकि एक बार बर्तन को बैग में रख दिया तो उसके पकने से पहले नहीं खोल सकते।
मेरी सेंदजो ने कहा , ‘ इसका एक नुकसान ये कहा जा सकता है कि इस तरह से खाना बनाने से 45 से 50 मिनट का समय ज्यादा लगता है। लेकिन पकानेवाले के लिए ये कोई समस्या नहीं है क्योंकि वो इस दौरान दूसरे काम कर सकता है। मैं इसे पसंद करती हूं, अब जलाने वाली लकड़ी का इस्तेमाल कम करती हूं और इस बैग में सभी तरह के पकवान बना सकती हूं।’
‘जैसे ही बैग से भाप निकलने लगती है खाना पक जाता है।’ ल्यूग ने बताया। ल्यूग स्थानीय बाजार को आकर्षित करने का प्रयास कर रही हैं।

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