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वॉट्सऐप के डॉक्टर्स… IPL में फिक्स होते हैं मैच? ऐसा मानने वालों को अंपायर अनिल चौधरी ने दिया जवाब


आईपीएल के 18वें सीजन में जाने-माने अंपायर अनिल चौधरी इस बार मैदान पर नहीं दिखेंगे, बल्कि क्रिकेट कॉमेंट्री करेंगे। अनिल चौधरी ने आईपीएल में 226 और इंटरनेशनल मैचों में 125 मुकाबलों में अंपायरिंग की है। उन्होंने कहा कि ‘फिक्सिंग’ के आरोप बेबुनियाद हैं और आईपीएल पूरी तरह पारदर्शी टूर्नामेंट है।
संजीव कुमार, रूपेश रंजन सिंह, अभिषेक उपाध्याय (नई दिल्ली): इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का 18वां सीजन शुरू होने जा रहा है। दुनिया भर के सितारे खिलाड़ी मैदान पर दिखेंगे। स्टेडियम में दर्शक भी खूब होंगे। मगर मैदान पर नहीं दिखेंगे देश के सबसे अनुभवी अंपायर्स में से एक अनिल चौधरी। IPL में रिकॉर्ड 226 मैच में अंपायरिंग करने के बाद आईसीसी पैनल के अंपायर अनिल अब क्रिकेट कॉमेंट्री की ओर रुख कर चुके हैं। वह अपने यूट्यूब चैनल Umpire’s call by anil Choudhary के जरिए क्रिकेट के नियम बताकर भी सुर्खियां बटोर रहे हैं। सोमवार को अनिल, NBT के दफ्तर पहुंचे और उन्होंने उन कई मुद्दों पर खुलकर अपने विचार रखें।
IPL आने के साथ जनभावना का अलग ही ज्वार उठता है। एक ही मुहल्ले के दो दोस्त दो अलग-अलग टीमों के साथ खड़े नजर आते हैं। कभी-कभी मैच में आखिरी लम्हों में कुछ अप्रत्याशित बदलाव भी देखने को मिलते हैं, जिससे कुछ लोग संदेह करने लगते हैं। हारने वाली टीम के फैंस ‘फिक्सिंग’ जैसे शब्द भी इस्तेमाल करते हैं। करीब 12 साल तक इंटरनैशनल अंपायरिंग करने वाले अनिल चौधरी से जब इसका जिक्र किया गया तो उन्होंने छूटते ही कहा, ‘यह सब भावनाओं से प्रेरित बातें हैं, एक तरह से कहें तो कोरी अफवाह।’ उन्होंने आगे कहा, ‘टी20 क्रिकेट की अनिश्चितता को लेकर अक्सर तरह-तरह की बातें होती हैं, लेकिन ‘फिक्सिंग’ के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।
IPL एक पारदर्शी टूर्नामेंट है, जहां हर मैच को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार नियंत्रित किया जाता है। टी20 फॉर्मेट खेल का नेचर ही ऐसा होता है कि मैच आखिरी ओवर तक रोमांचक बना रहता है। कभी-कभी कुछ अप्रत्याशित परिणाम भी देखने को मिलते हैं, जिससे कुछ लोग संदेह करने लगते हैं। लेकिन इन संदेहों की कोई ठोस बुनियाद नहीं होती। मैं क्रिकेट प्रेमियों यही सलाह दे सकता हूं कि ऐसी अफवाहों पर ध्यान ना दें। IPL के सीजन में उन्हें ‘वॉट्सऐप के डॉक्टर्स’ की सलाह से बचना चाहिए।’
खेल भावना और नियम – क्रिकेट में ‘खेल भावना’ की प्रासंगिकता के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘आप यदि मांकडिंग की बात कर रहे हैं तो मैं यही कहूंगा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं। रूल बुक के हिसाब से यदि मैदान पर कुछ भी हो रहा है तो अंपायर के नाते मैं उसे सही कहूंगा। एक अंपायर के तौर पर मेरे लिए ‘खेल भावना’ से ज्यादा महत्व रूल बुक का है। यदि कोई नियम बना है तो उसका पालन होना चाहिए। गेंद फेंके जाने तक रनर को क्रीज नहीं छोड़ना चाहिए। यदि वह ऐसा कर रहा है तो गलत है और अपनी रिस्क पर कर रहा है। यहां खेल भावना का हवाला देकर गेंदबाज को गलत नहीं ठहराया जा सकता। वैसे भी प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि इसमें खेल भावना की बातें करना बेमानी है। हर किसी को किसी भी हाल में जीत चाहिए।’
आईपीएल से बदली जिंदगियां – अनिल ने बताया कि आईपीएल एक शानदार मंच है जिसने ना सिर्फ प्लेयर्स बल्कि अंपायर्स की भी जिंदगियां बदलीं। उन्होंने कहा, ‘आईपीएल के आने से अंपायर्स की कमाई की बढ़ी है, इसे झुठलाया नहीं जा सकता। साथ ही कई अंपायर्स को अपना करियर आगे बढ़ाने का एक मंच भी मिल गया। हर अंपायर आईसीसी की एलिट लिस्ट में नहीं जा पाता। ऐसे में ये लीग उन अंपायर्स को बेहतर जिंदगी का वादा करता है। अंपायर्स को भी पहचान मिलती है।’
नंबर्स गेम – 226 आईपीएल मैचों में अंपायरिंग की है अनिल चौधरी ने
125 इंटरनैशनल मैचों में अंपायरिंग की है अनिल चौधरी ने
यह भीड़ के बीच से गाड़ी निकालने जैसा मामला – IPL मुकाबलों में इंटेसिटी भी बढ़ जाती है, कई बार विपक्षी टीमों के प्लेयर्स की बीच तीखी बहस भी हो जाती है। लीग के दौरान विराट कोहली और गौतम गंभीर के बीच हुई तीखी झड़प के दौरान फील्ड अंपायर्स में से एक अनिल भी थे। इस वाकये को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘ऐसी स्थिति में अंपायर की भूमिका बहुत बढ़ जाती है। प्लेयर्स को शांत करने के साथ-साथ मुकाबले को आगे बढ़ाने का जिम्मा होता है। उस गहमा-गहमी में अंपायर को बहुत ही ठंडा रहना होता है। यह कुछ ऐसा है जैसे आपको दिल्ली के चांदनी चौक की भीड़ से गाड़ी निकालनी होती है।’