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रोते वक्त बच्चा रोक लेता है सांस और चढ़ा लेता है आंखें? चाइल्ड एक्सपर्ट से जानें कारण और उपाय


अगर आपका बच्चा भी रोते-रोते अपनी सांस रोक लेता है या सांस चढ़ा लेता है, तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत मददगार साबित हो सकता है। क्‍योंक‍ि इसमें आप जान पाएंगे कि आखिर यह समस्या क्या होती है और ऐसी स्थिति में माता-पिता को क्या करना चाहिए ताकि बच्चे को तुरंत राहत मिल सके।
बच्चों का रोना सामान्य माना जाता है। कई बार वे अपनी बात शब्दों में नहीं कह पाते, तो उसे रोकर ही जताने की कोशिश करते हैं। वहीं, कभी-कभी जब उनकी कोई ज‍िद पूरी नहीं होती, तो भी वे रोने ही लगते हैं। कुल मिलाकर, बच्चे का रोना एक नॉर्मल बात समझी जाती है। हालांकि, एक स्थिति ऐसी भी होती है, जब बच्चे का रोना नॉर्मल नहीं माना जाता और वह है जब वह रोते-रोते अपनी सांस रोक ले या उसका चेहरा नीला पड़ जाए।
यह कोई साधारण बात नहीं, बल्कि एक विशेष कंडीशन हो सकती है, जिसे समझना माता-पिता के लिए बहुत जरूरी है। आइए मशहूर पीड‍ियाट्रि‍शन डॉक्‍टर पवन मंदाव‍िया से जानते हैं, यह स्‍थ‍ित‍ि क्या होती है और ऐसे समय में माता-पिता को क्या करना चाहिए।
ब्रेथ होल्डिंग स्पेल होती है यह कंडीशन – चाइल्ड एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस कंडीशन को ब्रेथ होल्डिंग स्पेल कहा जाता है। यह समस्या आमतौर पर 6 महीने से लेकर 5 साल की उम्र तक के बच्चों में देखी जाती है। इस स्थिति में बच्चा रोते-रोते अपनी सांस रोक लेता है। सांस रुकने की वजह से उसके दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिसके कारण बच्चा नीला पड़ने लगता है। फ‍िर उसे खेंच भी आने लगते हैं।
बच्‍चा रोते वक्‍त रोक लेता है सांस – इंस्टाग्राम वीडियो में डॉक्टर पवन मंदाविया एक बच्चे को दिखाते हुए बताते हैं कि यह बच्चा दो साल का है, और जब यह रोता है, तो अपनी सांस रोक लेता है। सांस रोकने के कुछ ही पल बाद इसका चेहरा नीला पड़ने लगता है, आंखें ऊपर चढ़ जाती हैं और फिर बच्चे को खेंच आने लगती है।
बच्‍चे को कंधे पर लेकर थपथपाएं – डॉ. मंदाविया कहते हैं कि ऐसी स्थिति में माता-पिता कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे- सबसे पहले बच्चे को गोद में लेकर उसे कंधे पर हल्के से थपथपाएं। आप जैसे ही थपथपाएंगे, तो रोना बंद होगा या फ‍िर उसके मुंह पर पानी मार दो, तो इससे रोना बंद करेगा।
फि‍र बच्‍चा रोना बंद कर देगा – एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जैसे ही बच्चा रोना बंद करता है, वह दोबारा सांस लेना शुरू कर देता है। इसके साथ ही ऑक्सीजन फिर से दिमाग तक पहुंचने लगती है और बच्चा धीरे-धीरे सामान्य होने लगता है। संभव है कि इस दौरान बच्चा कुछ देर के लिए सुस्त दिखे, लेकिन ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं होती। बाद में आप बच्चे को डॉक्टर को दिखाकर पूरी जांच करवा सकते हैं।
पेरेंट्स इस बातों का रखें ध्‍यान – चाइल्ड स्पेशलिस्ट बताते हैं कि यह समस्या ज्यादातर उन बच्चों में देखी जाती है जिनके शरीर में आयरन की कमी होती है। ऐसे मामलों में बच्चों को आयरन की दवाइयां दी जाती हैं, जिससे यह समस्या धीरे-धीरे कम हो सकती है। लेक‍िन, ब्रेथ-होल्डिंग स्पेल पांच साल की उम्र तक बने रहना सामान्य है, इसील‍िए पेरेंट्स इस बात का ध्‍यान रखें।