
हमने अक्सर लोगों को कहते सुना है कि हर इंसान को अपने कर्मों के हिसाब से फल मिलता है। जो इंसान जैसे कर्म करता है, उसे उसके अनुकूल फल प्राप्त होता है। तो आइए आज हम आपको इससे जुड़ी एक एेसी पौराणिक कथा बताते हैं, जो महाभारत की मुख्य महिला पात्रों में से एक द्रोपदी से बहुत गहरा संबंध रखती है।
पौराणिक कथानुसार एक बार द्रोपदी भोर के समय स्नान करने यमुना घाट पर गई। तभी उनका ध्यान एक साधु की ओर गया। जिनके शरीर पर मात्र एक लंगौटी थी। साधु स्नान के पश्चात अपनी दूसरी लंगौटी लेने गए तो वो लंगौटी अचानक हवा के झोंके से उड़ कर पानी में चली गई ओर बह गई।
संयोगवश साधु ने जो लंगौटी पहनी वो भी फटी हुई थी। साधु सोच में पड़ गया कि अब वह क्या करे। थोड़ी देर में सूर्योदय हो जाएगा और घाट पर भीड़ बढ़ जाएगी।
साधु तेजी से पानी के बाहर आया और झाड़ी के पीछे छिप गया। द्रोपदी ने यह सारा दृश्य देख अपनी साड़ी जो पहन रखी थी, उसमें से आधी फाड़ कर उस साधु के पास गई ओर उसे आधी साड़ी देते हुए बोली, तात! मैं आपकी परेशानी समझ गई। इस वस्त्र से अपनी लाज को ढंक लीजिए।
साधु ने संकोचते हुए साड़ी का टुकड़ा ले लिया और आशीष दिया, जिस तरह आज तुमने मेरी लाज बचाई उसी तरह एक दिन भगवान तुम्हारी लाज बचाएंगे। इसी कारण जब भरी सभा मे चीरहरण के समय द्रोपदी की करुण पुकार नारद ने भगवान तक पहुंचाई तो भगवान ने कहा, “कर्मों के बदले मेरी कृपा बरसती है, क्या कोई पुण्य है द्रोपदी के खाते में?”
जांचा-परखा गया तो उस दिन साधु को दिया वस्त्र दान हिसाब में मिला, जिसका ब्याज भी कई गुणा बढ़ गया था। जिसको चुकता करने भगवान पहुंच गए द्रोपदी की मदद करने, दुशासन साड़ी खींचता गया और हजारों गज कपड़ा बढ़ता गया।
शिक्षा- इंसान अगर सुकर्म करे तो उसका फल सूद सहित मिलता है, और दुष्कर्म करे तो सूद सहित भोगना पड़ता है।
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