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ऐतिहासिक शतक जड़ बोले जो रूट, पहली पारी में 600-700 रन का स्कोर बनाना चाहता है इंग्लैंड


इंग्लैंड के कप्तान जो रूट ने भारत के खिलाफ पहले टेस्ट के शुरुआती दिन शानदार शतक जड़ने के बाद कहा कि उनकी टीम पहली पारी में 600 से 700 रन का स्कोर खड़ा करना चाहेगी। रूट का यह 100वां टेस्ट है, जब वह यहां पहले टेस्ट के पहले दिन मांसपेशियों में खिंचाव से परेशान हो रहे थे, तब मेजबान टीम के कप्तान विराट कोहली उनकी मदद को आगे आए। टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड ने रूट के शानदार शतक की बदौलत स्टंप तक तीन विकेट पर 263 रन बना लिए।
रूट ने भारतीय स्पिनरों और तेज गेंदबाजों की रिवर्स स्विंग का बखूबी सामना किया। दिन का खेल समाप्त होने के बाद वर्चुअल मीडिया कांफ्रेंस में रूट ने कहा कि वह शनिवार को और बड़ी पारी के लिए तैयार होंगे। उन्होंने कहा, ‘हां, मैं और बड़ी पारी खेलना चाहूंगा। उम्मीद करता हूं कि मैं क्रीज पर लौटूं, यह थोड़ा निराशाजनक रहा लेकिन विराट (कोहली) का मेरा (मांसपेशियों की जकड़न के बाद) मदद करना, उनकी अच्छी खेल भावना दर्शाता है। यह लंबा दिन था और फिर कुछ ओवरों के बाद मैंने कुछ तरल पदार्थ लिया।’
दिन की शुरुआत अंग्रेजों ने बड़ी धीमी की थी। फिर रोरी बर्न्स (33) और लॉरेंस (0) का विकेट गिरने के बाद लगा कि भारतीय टीम का प्रदर्शन दिग्गजों की भविष्यवाणी के अनुसार ही है, लेकिन जो रूट और सिबली ने धांसू बैटिंग करते हुए दूसरे सत्र में पासा ही पलट दिया। रूट (128*) ने अपने 100वें टेस्ट में ऐतिहासिक शतक जड़ते हुए तमाम रेकॉर्ड अपने नाम किए तो महज 25 टेस्ट के अनुभवी डोमनिक सिबली (87) के आगे विराट की कोई चालाकी काम नहीं आई।
मैच से पहले केविन पीटरसन ने कहा था कि मैच का रिजल्ट कुछ भी हो, लेकिन जिसकी सबसे अधिक चर्चा होगी वह है कोहली की कप्तानी। यह सभी के लिए हॉट टॉपिक होगा। यह होता भी दिख रहा है। रहाणे ने जिस चतुराई से ऑस्ट्रेलिया को परेशान किया था वह कोहली नहीं कर पाए। रोरी बर्न्स को आउट करने के बाद बुमराह को गेंद थमाना उनका चतुराई वाला फैसला था, लेकिन इसके अलावा वह अपनी कप्तानी की कोई छाप नहीं छोड़ सके।
इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नै में जारी पहले टेस्ट मैच में भारत के लिए पेसर जसप्रीत बुमराह ही पहले दिन छाप छोड़ सके जिन्होंने 40 रन देकर दो विकेट लिए। उनके अलावा रविचंद्रन अश्विन ने भी एक विकेट झटका। अनुभवी ईशांत शर्मा कोई विकेट नहीं ले सके जबकि शाहबाज नदीम और वॉशिंगटन सुंदर भी पहले दिन खाली हाथ रहे।
गेंदबाजों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं होने पर कॉमेंटेटरों को कुलदीप यादव याद आए। आकाश चोपड़ा तक इस बात से हैरान दिखे कि स्टैंडबाई में आज ही शामिल किए गए शाहबाज नदीम को प्लेइंग-XI में शामिल कर लिया गया, जबकि कुलदीप कहीं बेहतर ऑप्शन हो सकते थे। अक्षर पटेल के चोट की वजह से कयास लगाया जा रहा था कि कुलदीप को जगह मिलेगी। कुलदीप के पिछले रेकॉर्डस को देखते हुए भी ये मुश्किल भी नहीं लग रहा था।
कॉमेंट्री के दौरान वीवीएस लक्ष्मण ने लंच ब्रेक के दौरान ही भविष्यवाणी कर दी थी कि इसके बाद शायद ही विकेट गिरे। यह देखने को भी मिला। लक्ष्मण ने कहा कि पाटा पिच है। अगर बल्लेबाज थोड़ा भी चतुराई दिखाएगा तो विकेट नहीं गिरेगा। रोचक बात यह है कि दिन की आखिरी गेंद पर सिबले (87) LBW आउट हुए। देखा जाए तो दूसरे और तीसरे सत्र में भारतीय गेंदबाजों का एटीट्यूड भी विकेट टेकिंग नहीं रहा था। हालांकि, आखिरी सत्र में ईशांत और अश्विन कई बार गेंद को बदलने के लिए चर्चा करते जरूर दिखे।
सबसे रोचक बात यह रही कि स्पिन को मदद करने वाली पिच पर पहले दिन सबसे सफल तेज गेंदबाज रहा। जसप्रीत बुमराह ने 18.3 ओवरों में 40 रन देकर 2 विकेट झटके, जबकि अपने घरेलू मैदान पर खेल रहे आर. अश्विन की झोली में 24 ओवरों की गेंदबाजी में 68 रन खर्च करने के बाद एक विकेट ही आया। सबसे अनुभवी तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा ने 15 ओवरों में 27 रन, शाहबाज नदीम ने 20 ओवरों में 69 रन और वॉशिंगटन सुंदर ने 12 ओवरों में 55 रन खर्च किए। इन तीनों ही गेंदबाज विकेट को तरसते दिखे।
पिच के बारे में बात करते हुए और इस पर कितने रन जुटाए जा सकते हैं, रूट ने कहा, ‘हमें देखना होगा और ज्यादा से ज्यादा रन बनाने की कोशिश करनी होगी कि हम अगर 600-700 रन बना सकें। पहली पारी में ज्यादा से ज्यादा रन बनाना अच्छा है। अगर हम कल पूरे दिन बल्लेबाजी कर सकते हैं या फिर तीसरे दिन तक तो चीजें हमारे लिए तेजी से आगे बढ़ सकती हैं। और फिर नहीं पता कि इसके बाद क्या हो सकता है।’
रूट श्रीलंका के खिलाफ इससे पिछली सीरीज में शानदार फार्म में थे लेकिन कहा कि वहां के हालात की तुलना भारत से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए सचमुच अच्छी शुरुआत रही है और हमें इसका फायदा उठाना होगा और इस दौरे पर हमारी चुनौती यही होगी। हमें इन परिस्थितियों में लंबे समय तक बल्लेबाजी करनी होगी।’