
मैंने कई ऐसे कपल्स देखे हैं जो प्रेग्नेंसी प्लान कर रहे हैं, लेकिन उन्हें ओव्यूलेशन के बारे में सही जानकारी नहीं होती। एक डॉक्टर होने के नाते मैं कहना चाहता हूं कि ओव्यूलेशन को समझना गर्भधारण के लिए बेहद जरूरी है। यह वह प्रक्रिया होती है जिसमें महिला के अंडाशय से एक परिपक्व अंडा रिलीज होता है। यह अंडा फैलोपियन ट्यूब में जाकर पुरुष के स्पर्म से मिल सकता है। अंडा और स्पर्म का यह मिलन (निषेचन) ही गर्भधारण की शुरुआत करता है। आइए, इस विषय को और विस्तार से समझते हैं।
कब होता है ओव्यूलेशन ? – ओव्यूलेशनआमतौर पर मासिक चक्र के बीच में होता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी महिला का पीरियड साइकल 28 दिन का है, तो ओव्यूलेशन अगले मासिक धर्म से लगभग 14 दिन पहले होता है। चूंकि हर महिला का चक्र अलग होता है, इसलिए ओव्यूलेशन कभी पहले या बाद में भी हो सकता है। इसलिए सही समय जानने के लिए अपने मेंस्ट्रुअल साइकल पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है।
ओव्यूलेशन के दौरान क्या होता है ? – ओव्यूलेशन के दौरान ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन का स्तर बढ़ता है। इससे फॉलिकल फट जाता है और अंडा फैलोपियन ट्यूब में चला जाता है। साथ ही, गर्भाशय का ग्रीवा बलगम पतला हो जाता है, जिससे शुक्राणु आसानी से अंडा तक पहुंच सके। संभावित प्रेग्नेंसी के लिए गर्भाशय की परत भी मोटी हो जाती है।
अंडाणु कब तक जीवित रहता है ? – अंडाशय से अंडाणु निकलने के बाद केवल 12 से 24 घंटे तक ही जीवित रहता है, जबकि शुक्राणु महिला के शरीर में 5 दिन तक रह सकते हैं। ओव्यूलेशन हमेशा दोनों अंडाशयों में बारी-बारी से नहीं होता। कुछ महिलाओं में एक ही अंडाशय से बार-बार ओव्यूलेशन हो सकता है।
ओव्यूलेशन के लक्षण
पेल्विस में हल्का दर्द (Mittelschmerz)
अंडे जैसी सफेदी जैसी, गाढ़ा और लचीला गर्भाशय ग्रीवा का बलगम
बेसल बॉडी टेम्परेचर में मामूली इजाफा
स्तनों में कोमलता या संवेदनशीलता
कुछ महिलाओं में हल्की स्पॉटिंग या पेट फूलन
नोट: लक्षण हर महिला में अलग हो सकते हैं और सभी महिलाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते।
ओव्लूयेश्न को कैसे ट्रैक करें – महिलाएं ओव्यूलेशन ट्रैक करने के लिए कई उपाय अपना सकती हैं। इसमें हर दिन बेसल बॉडी टेम्परेचर की निगरानी करना, सर्वाइकल म्यूकस में होने वाले बदलावों को देखना, मूत्र में LH surge का पता लगाने वाले ओव्यूलेशन प्रेडिक्टर किट का उपयोग करना और पीरियड कैलेंडर या ऐप्स का इस्तेमाल करना शामिल है। इन तरीकों को मिलाकर इस्तेमाल करने से सटीकता बढ़ती है और व्यक्तिगत चक्र पैटर्न को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।
कपल्स को जानना क्यों जरूरी है? – ओव्यूलेशन को समझने से कपल्स को फर्टाइल विंडो को पहचानने में मदद मिलती है यानी कि वह अवधि जब गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक होती है। चूंकि अंडाणु थोड़े समय के लिए ही जीवित रहता है, सही समय पर रिलेशन बनाने से प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ जाती है। इस अवेयरनेस से तनाव और अनावश्यक देरी भी कम होती है। साथ ही, अगर गर्भधारण अपेक्षा के अनुसार नहीं होता, तो कपल्स को जल्द से जल्द चिकित्सा सलाह लेने में मदद मिलती है। इस जागरूकता से तनाव और अनावश्यक देरी कम होती है। साथ ही, अगर गर्भधारण संभव नहीं होता, तो कपल्स को जल्द से जल्द चिकित्सा सलाह लेने में भी मदद मिलती है।
किन वजहों से ओव्यूलेशन हो सकता है प्रभावित – पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस),थायरॉइड विकार, हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया और प्रीमैच्योर ओवेरियन इन्फिशियेंसी जैसी स्थितियां ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा, लाइफस्टाइल से जुड़े कारक जैसे अत्यधिक वजन कम या अधिक होना, मोटापा, तनाव और अत्यधिक व्यायाम भी हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। अगर इन समस्याओं का सही समय पर निदान और उपचार न किया जाए, तो ये अनियमित मासिक धर्म चक्र, ओव्यूलेशन न होना या इन्फर्टिलिटी का कारण बन सकती हैं। इसीलिए, इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
महिलाएं इस बात का रखें ध्यान – स्वस्थ महिलाओं में भी मासिक चक्र में ओव्यूलेशन का समय अलग-अलग हो सकता है, इसलिए अनियमितता का मतलब हमेशा किसी समस्या से नहीं होता। साथ ही, यह ध्यान रखना जरूरी है कि उम्र अंडों की गुणवत्ता और संख्या पर काफी असर डालती है। रेग्यलूर जांच, सही और बैलेंस लाइफस्टाइल, और अगर पीरियड साइकल अनियमित हो या गर्भधारण में कठिनाई होतो, जल्द ही परामर्श लेने से प्रजनन स्वास्थ्य और क्षमता दोनों में ही काफी सुधार संभव है। इसीलिए, कपल्स घबराएं नहीं।
Home / Lifestyle / प्रेग्नेंसी प्लान कर रहे कपल्स के लिए ओव्यूलेशन की जानकारी है बेहद जरूरी, कंसीव करने में मिल सकती है मदद
IndianZ Xpress NZ's first and only Hindi news website