
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शुक्रवार को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergei Lavrov) के साथ मुलाकात की। यह मीटिंग कई मायनों में महत्वपूर्ण थी। सिर्फ इसलिए नहीं कि यह यूक्रेन के साथ रूस की जंग (Russia-Ukraine War) के बीच थी। अलबत्ता, यह देखते हुए भी कि हाल के दिनों में प्रधानमंत्री मोदी किसी भी देश के विदेश मंत्री से नहीं मिले हैं। इनमें ब्रिटेन और चीन के विदेश मंत्री (China and Britain Foreign Ministers) शामिल हैं। ये दोनों ही हाल में भारत दौरे पर आए। यह और बात है कि इनकी पीएम से मुलाकात नहीं हो सकी। इनके अलावा अमेरिका के डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (US deputy NSA) दलीप सिंह भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात नहीं कर सके थे।
पीएम मोदी का रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात का जिक्र विदेश मंत्रालय की ओर से जारी मीडिया एडवाइजरी में नहीं था। हालांकि, शुक्रवार को दोनों की बैठक हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने यूक्रेन में जल्द से जल्द हिंसा खत्म करने का आह्वान किया। साथ ही संघर्ष को सुलझाने के लिए शांति प्रयासों में योगदान देने के लिए भारत की रजामंदी जताई। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के एक बयान के मुताबिक, दौरे पर आए रूस के विदेश मंत्री ने मोदी को यूक्रेन की स्थिति समेत मॉस्को की कीव के साथ जारी शांति वार्ता के बारे में जानकारी दी।
न वांग यी मिल पाए न लिस ट्रस : खास बात यह है कि इसके पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी भारत के दौरे पर आए थे। उनका दो दिवसीय दौरा 25 मार्च को खत्म हुआ था। हालांकि, इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात नहीं हुई। कोरोना की महामारी और गलवान घाटी में भारत-चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद बीजिंग से किसी मंत्री की यह पहली यात्रा थी। उस लिहाज से देखें तो वांग का दौरा भी कई मामलों में महत्वपूर्ण था।
यह संयोग ही कहेंगे कि ब्रितानी विदेश मंत्री लिज ट्रस का दौरा भी रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ मैच कर गया। हालांकि, लिज ट्रस की भी मुलाकात पीएम मोदी से नहीं हुई। गुरुवार को यूक्रेन संकट पर ट्रस ने भारत में उनके समकक्ष एस जयशंकर के साथ बातचीत की। अपनी शुरुआती टिप्पणियों में ट्रस ने कहा था कि संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का सम्मान करना महत्वपूर्ण है।
इसके पहले अमेरिका के डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर दलीप सिंह भी बुधवार को भारत पहुंचे थे। लेकिन, पीएम मोदी और दलीप सिंह की मुलाकात भी नहीं हुई थी।
क्यों अहम है सर्गेई लावरोव के साथ पीएम की मुलाकात? : वहीं, सर्गेई लावरोव के साथ पीएम की मुलाकात होना यह अपने में ही काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। इससे यह भी पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी रूस के साथ संबंधों को कितनी ज्यादा तवज्जो देते हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ व्यापक बातचीत करने के बाद लावरोव ने पीएम से मुलाकात की। लावरोव गुरुवार शाम चीन के दो दिवसीय दौरे के बाद नई दिल्ली पहुंचे थे।
भारत कूटनीति और बातचीत के जरिये यूक्रेन संकट के समाधान की बात करता रहा है। किसी भी मंच पर भारत रूस की आलोचना से बचा है। रूस के खिलाफ अब तब संयुक्त राष्ट्र में जितने भी प्रस्ताव आए हैं, उनमें से किसी में भी भारत ने हिस्सा नहीं लिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 24 फरवरी, 2 मार्च और 7 मार्च को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बातचीत की थी। पीएम मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से भी दो बार बात की थी।
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