
एक खेमे की आलोचना और दूसरे खेमे में चल रहे जश्न के बीच अमेरिकी ट्रेड डील पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी है। ऐसा इसलिए क्योंकि असल में भारत और अमेरिका के बीच का ट्रेड डील अभी तक बनकर तैयार ही नहीं हुआ है। पिछले हफ्ते रेसिप्रोकल ट्रेड पर एक अंतरिम एग्रीमेंट के लिए फ्रेमवर्क की घोषणा की गई, जिसके तहत उस प्रोसेस पर चला जाएगा। जबकि मोदी सरकार का मकसद इंडियन इकॉनमी को बढ़ाना और उस असहनीय बोझ को कम करना होना चाहिए, जिसे 50 प्रतिशत टैरिफ के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद लागू किया था। इसीलिए भारत के लिए ये सवाल पूछना जरूरी है कि क्या यह भविष्य में भारत और अमेरिका के बीच होने वाले किसी भी दूसरे एग्रीमेंट में भी, चाहे वो रणनीतिक हों, या आर्थिक या फिर रक्षा से जुड़े हों, क्या उनके भी अमेरिका ट्रेड डील की तरह ही समझौते करेगा?
ट्रंप प्रशासन ने अभी तक इस डील पर हर घोषणा एकतरफा ही की है। ट्रंप ने दावा किया है कि भारत ने उससे वादा किया है कि रूसी तेल नहीं खरीदा जाएगा। ट्रंप ने धमकी भी दी है कि अगर भारत ने रूसी तेल खरीदा तो 25 प्रतिशत टैरिफ वापस आ जाएगा। ट्रंप ने 6 फरवरी को जिस एग्जक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत किए हैं, उनमें इसी बात का जिक्र किया गया है। इसमें ये भी कहा गया है कि भारत, अमेरिका से बहुत ज्यादा सामान खरीदेगा। इसके अलावा भारत, भारतीय सामानों पर 18% अमेरिकी टैरिफ के बदले में अमेरिका के खिलाफ टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर को “जीरो” कर देगा। जबकि मोदी ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने का भी वादा किया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति पर US के साथ एलाइन करेगा भारत? – प्रधानमंत्री मोदी ने एक पोस्ट करते हुए अमेरिका से ट्रेड डील होने के लिए देशवासियों को बधाई दी और कहा कि टैरिफ कम किए जाएंगे। इसके चार दिन बाद (अमेरिकी समय के मुताबिक सुबह 4 बजे), वॉशिंगटन ने रूस और ईरान पर संयुक्त बयान और दो एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किए और उसके बाद एक “फैक्ट शीट” भी जारी की। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ने कुछ घंटों बाद ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया। सरकार ने तब से अपने सार्वजनिक बयानों में दूसरे डॉक्यूमेंट्स पर बात करने से मना कर दिया है। लेकिन एकतरफा ‘ज्वाइंट स्टेटमेंट’ लाने का पूरा तरीका यह सवाल खड़ा करता है। फैसले कौन ले रहा है?
Home / News / डोनाल्ड ट्रंप की दबाव की राजनीति के आगे झुका भारत? अमेरिका से हुई एक तरफा ट्रेड डील? जानें क्यों उठ रहे सवाल
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