
इस बात को तो आप भी समझते होंगे कि बच्चे अपनी बात मनवाने के लिए कई तरीके अपनाते हैं। मनचाही बात मनवाने के लिए कभी वो रोना शुरू कर देते हैं, इमोशनल ब्लैकमेल करते हैं तो कभी पैरेंट्स को ये एहसास दिलाना शुरू कर देते हैं कि वो उनसे प्यार ही नहीं करते हैं।
बच्चे हों और नखरे ना दिखाएं, ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। हर छोटी चीज पर बच्चे नखरे दिखाते हैं। नखरे शब्द को जानने और समझने से पहले ही वो इसे करना सीख लेते हैं। शिशु होने पर अपने पैरेंट्स का ध्यान खींचने, नींद आने या भूख लगने पर वो रोते हैं। जब भी उन्हें भूख लगती है, नैपी बदलवानी होती है या गोद में सोना होता है, वो रोना शुरू कर देते हैं और उनके पैरेंट्स भागकर उनके पास चले आते हैं। इससे बच्चे के दिमाग में ये बात बैठ जाती है कि रोने से उसे वो सब मिल जाएगा, जो वो चाहता है।
बड़े होने पर जब उसे चॉकलेट, कोई खिलौना, पिज्जा या कुछ भी चाहिए होता है तो रोने को ही अपना हथियार बनाता है। जब उसके ये तरीके फेल हो जाते हैं, तो वो झूठ, पैरेंट्स को गलत बोलने या उन्हें ये एहसास दिलाने लगता है कि उन्हें उसकी कोई चिंता नहीं है या वो उससे प्यार नहीं करते हैं। कभी-कभी इस तरह भी बच्चे अपनी डिमांड पूरी करवा लेते हैं।
बच्चों की इस हरकत को मैनिपुलेशन कहते हैं जहां वो अपनी बात मनवाने के लिए पैरेंट्स से झूठ बोलते हैं या उन्हें गिल्टी महसूस करवाना शुरू कर देते हैं। अगर आपका भी मैनिपुलेटिव चाइल्ड है, तो कुछ आसान तरीकों से आप उसे संभाल सकते हैं।
कोई लक्ष्य तय करें : अगर आपका बच्चा बार-बार अपनी जिद को पूरा करवाने के लिए मैनिपुलेट कर रहा है, तो आप उसके लिए कोई गोल सेट कर दें। जैसे कि उसे कहें कि जो उसे चाहिए वो सात दिन तक इंतजार करने के बाद मिलेगा। इससे बच्चे को अपनी जरूरत को कंट्रोल करना सीखने का गुण आ जाता है।
एक्शन प्लान : जब भी आपका बच्चा मैनिपुलेट करता है या किसी चीज के लिए जिद करता है, तो आप उसके लिए एक एक्शन प्लान तैयार करें। इसमें परिवार के कुछ मूल्य शामिल होंगे और बताएं कि एक अच्छा इंसान बनने के लिए उसमें क्या खूबियां होनी चाहिए। जब बच्चे को समझ आएगा कि उसे अच्छा इंसान बनना है, तो वो गलत तरीकों का इस्तेमाल करना अपने आप ही छोड़ देगा।
नियम साफ करें : सही बिहेव करने के लिए आप बच्चे के सामने कुछ नियम और निर्देश बनाएं। उन्हें लिखकर बच्चे के सामने पड़ने वाली किसी दीवार पर लगा दें। ये नियम बहुत सरल होने चाहिए और स्ट्रिक्ट नहीं होने चाहिए साथ ही इससे बच्चे की सोच और एक्शन कंट्रोल नहीं होने चाहिए। परिवार के सभी सदस्य इन नियमों को फॉलो करें। इन नियमों से आपका बच्चा जिम्मेदार बनेगा और नखरे दिखाना कम कर देगा।
फैमिली एक्टिविटीज करें : बच्चे के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने के लिए, खाने में क्या बनाना है, वीकएंड पर क्या करना है, जैसे छोटे-छोटे कामों और फैसलों में शामिल करें। फैमिली के साथ कुछ मजेदार एक्टिविटीज करें। इससे बच्चा खुश रहेगा और उसे मैलिपुलेट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
रोल मॉडल बनें : आप अपने बच्चे के रोल मॉडल की तरह काम करें। बच्चे अपने पैरेंट्स को देखकर ही सीखते हैं। आप उसके साथ एक गेम खेलें जिसमें वो पेरेंट और आप बच्चे बनें। इस गेम के दौरान इस तरह बिहेव करें कि आपको अपनी बात मनवाने के लिए गलत रास्तों को अपनाने की जरूरत नहीं है बल्कि धैर्य से काम लेना है। शायद आपकी बात आपके बच्चे को समझ आ जाए।
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