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सांसदों के विरोध का कैसे सामना करेंगे कैमरन

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ब्रिटेन यूरोपीय संघ में रहेगा या नहीं, इस पर 23 जून को जनमत संग्रह होना है। इससे पहले ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन की सत्तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी के नेतृत्व को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। बागी सांसदों ने यूरोपीय संघ में ब्रिटेन की सदस्यता के मुद्दे से निपटने को लेकर कैमरन के खिलाफ बयानबाजी शुरू की दी है। ये सांसद खुलतौर पर कहने लगे हैं कि जब तक आर्थिक समूह में ब्रिटेन को बनाए रखने के लिए कैमरन बहुमत से जीत हासिल नहीं करते, प्रधानमंत्री के रूप में उनका भविष्य अधर में होगा। पार्टी के आधे सांसद चाहते हैं कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ को छोड़ दे।

ब्रिटेन के प्रमुख अखबार संडे टाइम्स के अनुसार टोरी सांसदों ने कैमरन को लंगड़ी बत्तख कह कर कटाक्ष किया है। इस समय कैमरन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए उन्हें 50 सांसदों की जरुरत हैं। उनका दावा है कि यदि कैमरन जनमत संग्रह में विजयी भी हो जाते हैं तब भी उनकी स्थिति अस्थिर रहेगी। कैमरन के खिलाफ 50 सांसदों की व्यवस्था कोई मुश्किल काम नहीं होगा।

कैमरन चाहते हैं कि ब्रिटेन यूनियन में बना रहे। माना जा रहा है कि 23 जून को होने वाले जनमत संग्रह के नतीजे का ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था, खासतौर पर उसके विदेशी व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक कद पर गहरा असर पड़ेगा। समस्या यह है कि कंजरवेटिव पार्टी के कई लोग, जिनमें कई मंत्री भी शामिल हैं वे यूरोपीय यूनियन को छोड़ना चाहते हैं। यूनियन छोड़ने के समर्थक वोटरों के अनुसार ब्रिटेन के शामिल होने से यहां तुर्की से आने वाले शरणार्थी ब्रिटेन आने लगेंगे जिससे देश की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।

कैमरन के मुताबिक ब्रिटेन और ईयू के दूसरों देशों को किसी अन्य देश के जुड़ने को वीटो करने का अधिकार है। यूरोपीय यूनियन छोड़ने वाले समर्थकों को ऐसी गलत बातों के अलावा उन बड़े कारणों पर बहस करनी चाहिए कि ब्रिटेन यूनियन को क्यों छोड़ना चाहता है। उनका मानना है कि तुर्की यूनियन से जल्दी जुड़ पाएगा, यह इतना आसान नहीं है। कैमरन ने चेतावनी दी है कि यूरोपीय यूनियप छोड़ने से खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि हो जाएगी, क्योंकि पाऊंड स्टर्लिंग की कीमत गिरने से आयात महंगा हो जाएगा। अन्य सामान की कीमतें भी बढ़ जाएंगी। स्टर्लिंग की कीमत 12 प्रतिशत गिरने का अनुमान है। एक विश्लेषण के अनुसार एक औसत परिवार में खाने पीने का खर्च प्रति सप्ताह लगभग 3 प्रतिशत या प्रतिवर्ष 120 पाऊंड (175 डॉलर) तक बढ़ जाएगा। कपड़ों और फुटवियर्स की कीमल 5 प्रतिशत या 100 पाऊंड प्रतिवर्ष बढ़ सकती है।

गौरतलब है कि ब्रिटेनवासियों ने कंजरवेटिव और डेविड कैमरन की नीतियों व नेतृत्व में भरोसा जताने के बाद ही उन्हें सत्ता सौंपी थी। साथ ही, क्षेत्रीय और छोटे दलों के उभारने से यह संकेत मिला कि ब्रिटेन की राजनीति अब नए दौर में प्रवेश करने वाली है। अप्रैल 2016 में हुए चुनाव में डांवाडोल होती अर्थव्यवस्था और यूरोपीय संघ से बाहर होने को लेकर जनमत संग्रह बड़े मुद्दे बने थे। कैमरन के पिछने कार्यकाल में उठाए गए सुधारवादी कदमों को काफी सराहा गया था। मतदाताओं को लगा कि डेविड कैमरन ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला सकते हैं। इस समय उन्हीें के नेतृत्व को चुनौती दी जाने लगी है।

इसमें दो राय नहीं कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था कई समस्याओं से जूझ रही है। इसे दूर करने के लिए कई खर्चों में कटौती करनी होगी। सरकार के सामने दो प्रमुख चुनौतियां हैं। पहली, चुनाव पूर्व किए गए वायदों को निभाना है और दूसरा, यूरोपीय संघ की सदस्यता के मुद्दे पर जनमत संग्रह कराना है। कैमरन जानते हैं कि यूरोपीय संघ को छोड़ने से ब्रिटेन विश्व में अपनी अहमियत खो सकता है। उसे कई आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। उन्हें स्थिति को संतुलित बनाए रखना है। वे अपने अभियान में जुट गए हैं, देखना यह है कि वे इसमें कहां तक कामयाब होते हैं।

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