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पश्चिम एशिया संकट पर BRICS में कैसे बने आम राय, भारत की बढ़ी चुनौती, आपस में युद्ध लड़ रहे कई सदस्य देश


पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर भारत ने कहा है कि वह ब्रिक्स का साझा रुख विकसित करने का प्रयास कर रहा है, हालांकि सदस्य देशों के बीच मतभेदों के कारण अब तक आम सहमति नहीं बन पाई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शनिवार को किसी देश का नाम लिए बगैर कहा कि ब्रिक्स के कुछ सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे शामिल हैं, जिसकी वजह से ग्रुप के लिए एक साझा रुख तय करना कठिन हो गया है। ऐसे में ब्रिक्स के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में भारत के सामने चुनौती है कि पश्चिम एशिया के इस संघर्ष पर ब्रिक्स का एक साझा रुख कैसे तैयार किया जाए।
उन्होंने कहा कि भारत ‘शेरपा चैनल’ के माध्यम से 11 ब्रिक्स देशों के बीच चर्चा को आगे बढ़ा रहा है। अंतिम शेरपा बैठक 12 मार्च को डिजिटल माध्यम से आयोजित की गई थी।
जायसवाल ने कहा, हम एक साझा रुख तय करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अलग-अलग विचारों के कारण आम सहमति नहीं बन पाई है।
विदेश मंत्रालय ने प्रवक्ता ने बताया कि, हम ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि इस संघर्ष पर कोई साझा रुख तय किया जा सके।
भारत के लिए क्यों है चुनौती? – वर्तमान में ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है, लेकिन संकट पर नई दिल्ली द्वारा संयुक्त बयान जारी करना नाजुक स्थिति है, क्योंकि ब्रिक्स के तीन सदस्य देश- ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब इस संघर्ष में शामिल हैं।
ईरान ने की ब्रिक्स के एकजुटता का आह्वान – गुरुवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अरागची के बीच हुई फोन पर बातचीत हुई। ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के दो सप्ताह बाद से यह उनकी चौथी वार्ता थी – तेहरान ने बिगड़ती स्थिति पर ब्रिक्स की एकजुटता का आह्वान किया है।
ब्रिक्स में कौन-कौन से देश शामिल – ब्रिक्स समूह में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में विस्तार कर मिस्र, इथोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी इसमें शामिल हो गया। ब्रिक्स अब एक प्रभावशाली समूह बनकर उभरा है, जिसमें दुनिया की 11 बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं।