
ह्यूमन राइट्स वॉच ने इजरायल पर आरोप लगाया कि गाजा और लेबनान में सैन्य अभियानों के दौरान इजरायली डिफेंस फोर्स ने व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया था. ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा, ‘यह नागरिकों को गंभीर और दीर्घकालिक चोटों के जोखिम में डालता है.’
संस्था ने कहा, ‘दुनिया की सबसे घनी आबादी वाले इलाकों से एक गाजा में नागरिकों के खिलाफ व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल वहां रहने वाले नागरिकों के जीवन को जोखिम में डालता है, इसके साथ ही ये अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करता है.’
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इजरायली सेना ने लेबनान में व्हाइट फॉस्फोरस के इस्तेमाल पर कोई टिप्पणी नहीं की है. इसके अलावा सेना ने गाजा इलाके में व्हाइट फॉस्फोरस के इस्तेमाल को लेकर कहा है कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है.
क्या होता है व्हाइट फॉस्फोरस? – व्हाइट फॉस्फोरस एक ऐसा पदार्थ जो हवा के संपर्क में आने के साथ ही जल उठता है. जब व्हाइट फॉस्फोरस हवा के संपर्क में आता है तब उसमें 800 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा का तापमान निकलता है. इसका इस्तेमाल जंगी कार्रवाईयों में होता है, जब व्हाइट फॉस्फोरस इंसानों के संपर्क में आता है तो इससे शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचता है. इंसानी शरीर में इसके संपर्क में आने से असहनीय जलन होती है.
इसके संपर्क में आने के बाद घायल व्यक्ति को सांस की समस्या हो सकती है, शरीर के कई अंग खराब हो सकते हैं. अगर शरीर का 10 फीसद हिस्सा इसके संपर्क में आता है तो इससे जान जाने का खतरा रहता है, लेकिन जो लोग व्हाइट फॉस्फोरस के घावों को झेल कर बच जाते हैं, उनकी बाकी की जिंदगी तबाह हो जाती है, सारी उम्र उन्हें दर्द झेलना पड़ता है.
कई मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि इससे इंसानी हड्डियां तक जल जाती है. बीबीसी के मुताबिक, व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल जमीनी सैन्य गतिविधियों को छुपाने के लिए किया जाता है. सेनाएं इसके इस्तेमाल से एक स्मोकस्किन (धुंए का गुबार) तैयार करती हैं.
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