
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को इजरायली संसद को संबोधित किया है। इसपर दुनियाभर के एक्सपर्ट्स की प्रतिक्रिया आ रही है। इसके अलग अलग जियो-पॉलिटिकल मतलब निकाले जा रहे हैं। इजरायली अखबार जेरूशलम पोस्ट में एनालिस्ट हर्ब कीनन ने लिखा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में अपने भाषण का अंत “अम यिसराइल चाई” शब्दों के साथ किया जो शायद अजीब न लगा हो। क्योंकि एक विदेशी नेता मेजबानों को खुश करने के लिए उनकी मातृभाषा में कुछ शब्द अकसर बोलते हैं, लेकिन मोदी ने जो कहा है उसका ऐतिहासिक असर होगा। क्योंकि महात्मा गांधी से लेकर जवाहरलाल नेहरू तक जायोनिज्म के खिलाफ थे और उन्होंने भारत को कई वर्षों तक इजरायल से दूर रखा।
लेकिन आज दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाले देश का नेता देश की संसद में खड़ा था और अपने देश को बनाने वाले नेताओं की सोच से अलग हटकर ऐलान कर रहा था कि “इजरायल के लिए लोग जिंदा हैं।” इसीलिए मोदी ने नेसेज में जो कहा है उसके मायने काफी अलग हैं। मोदी ने सिंधु घाटी और जॉर्डन घाटी का जिक्र किया। उन्होंने टिक्कुन ओलम के बारे में बात की, जो दुनिया को ठीक करने के लिए हिब्रू शब्द है और वसुधैव कुटुम्बकम की बात कही जिसका मतलब है “पूरी दुनिया एक परिवार है।” उन्होंने हनुक्का और पुरीम को दिवाली और होली जैसे हिंदू त्योहारों के साथ रखा।
‘मोदी की बातों में दो सभ्यताओं का मेल था’ – इजरायली अखबार में लिखते हुए हर्ब कीनन ने लिखा है कि मोदी ने जो कहा था वो व्यापार नहीं था बल्कि यह दो पुरानी सभ्यताओं का मेल था। लेकिन उनके भाषण का सबसे अहम हिस्सा सभ्यता के जिक्र में नहीं बल्कि नैतिक साफगोई में था। मोदी ने कहा कि “मैं भारत के लोगों की गहरी संवेदनाएं अपने साथ रखता हूं। हर उस जान के लिए जो गई, और हर उस परिवार के लिए जिनकी दुनिया 7 अक्टूबर को हमास के बेरहम आतंकवादी हमले में तबाह हो गई।” मोदी ने कहा कि “भारत इस समय और आगे भी इजरायल के साथ मजबूती से पूरे यकीन के साथ खड़ा है।”
Home / News / भारत बिना किसी हिचकिचाहट के इजरायल के साथ खड़ा, PM मोदी के भाषण के बाद क्या कह रहे इजरायली एक्सपर्ट?
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