Thursday , January 15 2026 10:05 PM
Home / Lifestyle / बच्‍चा बदतमीजी की हद पार कर देता है? एक्‍सपर्ट बोले-क्‍यूट समझकर इग्‍नोर न करें, वरना 5 साल बाद राक्षस बनकर यही …

बच्‍चा बदतमीजी की हद पार कर देता है? एक्‍सपर्ट बोले-क्‍यूट समझकर इग्‍नोर न करें, वरना 5 साल बाद राक्षस बनकर यही …

अगर आपका बच्चा बात-बात पर बदतमीजी करता है और आप उसे क्यूट समझकर इग्नोर कर देते हैं, तो ऐसा करना बिल्कुल भी सही नहीं है। पीडियाट्रिशियन डॉक्टर रोहित भारद्धाज के मुताबिक, इस तरह की आदतें आगे चलकर बच्चे की पर्सनैलिटी पर नकारात्मक असर डालती हैं। इसील‍िए माता-प‍िता को इस बात का ध्‍यान रखना चाह‍िए।
आमतौर पर बच्चे शरारत करते हैं, लेकिन कई बार यही शरारत हद पार कर बदतमीजी में बदल जाती है। बच्चा बात-बात पर उल्टा जवाब देने लगता है या कोई चीज न मिलने पर जि‍द करता है, फर्श पर लेट जाता है, जोर-जोर से रोता है या चीख-चिल्लाने लगता है। ऐसे में कई पैरेंट्स इन आदतों को ‘बच्चा है’ कहकर नजरअंदाज कर देते हैं या यह सोचते हैं कि समय के साथ सब अपने-आप ठीक हो जाएगा। हालांकि, पीड‍ियाट्र‍िशयन डॉक्‍टर रोह‍ित भारद्धाज कहते हैं कि पेरेंट्स की यह सोच गलत है और अगर शुरुआत में ध्यान न दिया जाए, तो ये आदतें आगे चलकर और गंभीर हो सकती हैं। आइए जानते हैं क‍ि एक्‍सपर्ट ने और क्‍या कहा।
बच्‍चे की बदतमीजी को क्‍यूट समझकर न करें इग्‍नोर – पीडियाट्रिशियन डॉ. रोहित भारद्वाज का कहना है कि अगर आपका बच्चा बहुत ज्यादा जिद करता है, बात-बात पर उल्टा जवाब देता है, तो उसे सिर्फ ‘बच्चा है’ या ‘क्यूट है’ कहकर नजरअंदाज न करें। डॉक्टर के अनुसार, अगर इस तरह की आदतों को समय रहते नहीं सुधारा गया, तो पांच साल बाद यही आदतें बच्चे को बाद में Demons (राक्षस या दानव) बनकर हॉन्‍ट करेंगी। फ‍िर उस वक्त समाज की ठोकर उसे स‍िखाएगी।
बच्‍चा अनसुना करता है, तो उसके लेवल पर जाकर बात करें – वे आगे बताते हैं कि अगर बच्चा आपकी बात को अनसुना करता है या आपकी बातों को इग्नोर कर देता है, तो दूर से चिल्लाने की बजाय उसके पास जाएं, उसके लेवल पर बैठें और आंखों में आंखें डालकर बात करें। दरअसल, इतने पास से किसी की बात को नजरअंदाज करना बच्चे के लिए भी मुश्किल हो जाता है।
बच्‍चे को समझाएं नाराजगी ठीक है, लेक‍िन बदतमीजी बर्दाश्‍त नहीं – चाइल्ड स्पेशलिस्ट इंस्‍टाग्राम वी‍ड‍ियो में आगे कहते हैं कि बच्चे के लेवल पर आकर उसे यह समझाना जरूरी है कि आप गुस्सा हो सकते हैं, लेकिन बदतमीजी करना सही नहीं है। साथ ही, यह भी ध्‍यान रखें क‍ि बच्‍चे को मार-पीट या चिल्लाने से बच्चा उस समय डरकर आपकी बात मान सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में इससे कोई फायदा नहीं होगी। इसील‍िए इस बात का ध्‍यान रखें।
बच्‍चों के संग खेलते वक्‍त झूठ बोलता है तो ये आदत भी ठीक नहीं -एक्सपर्ट आगे यह भी बताते हैं कि अगर खेलते समय बच्चा दोस्तों के सामने झूठ बोलता है या छोटी-छोटी बातें आपसे छिपाता है, तो ऐसी स्थिति में उसे कोई ताज न पहनाएं। इस आदत को शुरुआत में ही ठीक करना जरूरी है, क्‍योंक‍ि जब वह टीनएजर में पहुंचेगा, तो पेरेंट्स से बड़ा झूठ बोलेगा और आपका भरोसा तोड़ने से पहले एक पल भी नहीं सोचेगा।
बच्‍चे को मेहनत करने दो – डॉक्टर बताते हैं कि बच्चे की हर मांग को तुरंत थाली में सजाकर पूरा न करें। इसकी बजाय उसे उम्र के मुताबिक छोटे-छोटे टास्क दें, ताकि वह मेहनत करना सीखे और अपनी पसंद की चीज़ को कमाने का अनुभव समझे। जब बच्चा वह टास्क पूरा कर ले, तभी उसे वह चीज दें। इससे बच्चा दो अहम बातें सीखता है और वह पहली, मेहनत की अहमियत और दूसरी, आपकी कोशिशों और चीजों की कदर करना।