
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि मालदीव में भारतीय सैन्य कर्मी और विमानन मंच पूरी तरह से स्थानीय लोगों के लाभ के लिए काम कर रहे हैं।उन्होंने विश्वास जताया कि मालदीव के साथ विवाद को कूटनीति के माध्यम से हल किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कभी-कभी दो देशों के बीच गलतफहमियां हो जाती हैं। विदेश मंत्री सोमवार को ‘द राइज ऑफ द ग्लोबल साउथ’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। मालदीव विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए जयशंकर ने कहा, “मानवता ही मानवता है। कूटनीति कूटनीति है और राजनीति राजनीति है। दुनिया हमेशा दायित्व से नहीं चलती…इसलिए अगर हमने ऐसी स्थिति का सामना किया है, तो समाधान जरूर निकलेगा।”
उन्होंने कहा, “हमें लोगों को समझाना होगा, कभी-कभी लोगों को चीजों की पूरी जानकारी नहीं होती है, कभी-कभी लोग दूसरों की बातों से गुमराह हो जाते हैं।” जयशंकर ने आगे मालदीव में भारतीय सैन्य कर्मियों और विमानन प्लेटफार्मों द्वारा किए गए प्राथमिक कार्यों का वर्णन किया। जयशंकर ने कहा ” मालदीव में दो भारतीय हेलीकॉप्टर और एक विमान हैं। ज्यादातर, इसका उपयोग मेडवैक (चिकित्सा निकासी) उद्देश्यों के लिए किया जाता है। मालदीव के लोग इसके लाभार्थी हैं। लेकिन, ये सैन्य विमान हैं, तो उन्हें कौन चलाएगा? जाहिर है, सैन्य कर्मी “। उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष मालदीव पक्ष के साथ कई दौर की चर्चा कर रहा है ताकि उनके बीच जो भी मतभेद हैं उन्हें सुलझाया जा सके।
विदेश मंत्री ने जयशंकर ने कहा कि “उन्हें कुछ आपत्ति थी, इसलिए हमने कहा, ‘चलो, चर्चा करते हैं और समाधान तक पहुंचते हैं। इसलिए, भले ही हमारी मंशा अच्छी हो, नीति स्पष्ट हो, हम ऐसी स्थिति में पहुंच जाते हैं, और हमें समाधान ढूंढना होगा। मैं दृढ़ता से कहता हूं विश्वास है कि हम इस मामले को भी सुलझाने में सक्षम होंगे”।गौरतलब है कि मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को चीन का करीबी माना जाता है और उन्होंने ‘इंडिया आउट’ की तर्ज पर चुनावी अभियान भी चलाया था। सत्ता में आने के बाद से उन्होंने कई ऐसे कदम उठाए हैं जो भारत-मालदीव संबंधों के लिहाज से अपरंपरागत रहे हैं। देश से भारतीय सैनिकों को हटाना मुइज्जू की पार्टी का मुख्य चुनाव अभियान था और उन्होंने पद संभालने के दूसरे दिन ही इस संबंध में नई दिल्ली से औपचारिक अनुरोध किया था।
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