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नस्लवाद के विरोध में घुटने टेकना सिर्फ दिखावा है, जरूरत कड़े कानून की है: कार्लोस ब्रैथवेट


वेस्टइंडीज के हरफनमौला खिलाड़ी कार्लोस ब्रैथवेट ने कहा है कि नस्लवाद के खिलाफ लड़ाई में एक घुटने पर बैठकर विरोध प्रदर्शन करना, या बैच लगाना काफी नहीं है बल्कि इसके लिए मानसिकता में बदलाव की जरूरत है। अमेरिका में पुलिस हिरासत में हुई अश्वेत शख्स जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ नाम के आंदोलन ने पूरे विश्व में जोर पकड़ा है। ब्रैथवेट को लगता है कि वक्त की जरूरत कानून में बदलाव की है।
ब्रैथवेट ने कहा, ‘अकेले में एक घुटने पर बैठकर विरोध करना, बैच पहनना काफी नहीं है। जरूरत है मानसिकता में बदलाव की। मेरे लिए यह सिर्फ उबटन की तरह है, जो शायद कुछ चीजें बदल सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘सबसे बड़ा बदलाव कानूनी रूप से करना है और पूरे समाज को दोबारा से बदलना है।’
क्रिकेट पर कब-कब पड़ा नस्लवाद का साया
क्रिकेट की दुनिया में भी नस्लवाद नजर आया है। कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने भद्रजनों के इस खेल की भावना पर सवाल उठाए हैं। फिर चाहे टोनी ग्रेग हों या फिर डीन जोंस। कई विवादों ने इस खेल की स्प्रिरिट पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा, ‘ऐसा क्यों है कि जब हम प्लेन में जाते हैं तो किसी को बहुत घनी दाढ़ी में देखते हैं तो लगता है कि वह आतंकवादी है? जब हम सुपरमार्केट में कोई अश्वेत लड़के को देखते हैं तो क्यों लगता है कि वह कर्मचारी है। यह बड़ी चर्चा है। हम किस तरह से अपनी मानसिकता को बदलेंगे यह बड़ी चर्चा है एक घुटने पर बैठने से कई ज्यादा।’