
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व प्रमुख ललित मोदी ने आईपीएल में निजी इक्विटी फर्म सीवीसी कैपिटल्स पार्टनर्स के प्रवेश पर सवाल उठाए हैं क्योंकि इसका निवेश सट्टेबाजी गतिविधियों से जुड़ी कंपनियों में है। सीवीसी ने दुनिया की सबसे बड़ी टी20 लीग की अहमदाबाद फ्रेंचाइजी को खरीदने के लिए 5625 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी।
सीवीसी स्वयं को निजी इक्विटी के क्षेत्र में दुनिया की शीर्ष कंपनी बताती है जो 125 अरब डॉलर की संपत्तियों का प्रबंधन करती है। लखनऊ फ्रेंचाइजी को आरपीएसजी वेंचर्स ने 7090 करोड़ रुपये में खरीदा। सीवीसी की वेबसाइट के अनुसार उसका निवेश टिपिको और सिसल जैसी कंपनियों में हैं जो खेल सट्टेबाजी से जुड़े हैं। भारत में सट्टेबाजी वैध नहीं है। सीवीसी अतीत में फार्मूला वन में भी निवेश कर चुका है और अब उसकी हिस्सेदारी प्रीमियरशिप रग्बी में है।
मोदी ने मंगलवार को ट्वीट किया कि मुझे लगता है कि सट्टेबाजी कंपनियां आईपीएल टीम खरीद सकती हैं। शायद कोई नया नियम है। बोली जीतने वाला एक बोलीदाता एक बड़ी सट्टेबाजी कंपनी का मालिक भी है। आगे क्या होगा। क्या बीसीसीआई ने अपना काम नहीं किया। भ्रष्टाचार रोधी इकाइयां ऐसे मामले में क्या करेंगी। आईपीएल टीम के लिए दिग्गज फुटबॉल क्लब मैनचेस्टर यूनाईटेड के मालिकों ने भी बोली लगाई थी।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि दुबई में रविवार को पारदर्शी बोली प्रक्रिया का पालन किया गया। अधिकारी ने कहा कि कमरे में मौजूद किसी भी बोलीदाता को बोली प्रक्रिया से कोई दिक्कत नहीं थी। इस प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से अंजाम दिया गया। विजयी बोलियां आईपीएल की बढ़ती वैश्विक अपील को दर्शाती हैं।
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