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टुकड़े-टुकड़े हो सकता है ब्रिटेन, स्कॉटलैंड में दूसरे जनमत संग्रह की तैयारी

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लंदन : जनमत संग्रह ने ब्रिटेन को यूरोपियन यूनियन से बाहर होने का रास्ता साफ कर दिया। इसके साथ ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन की कुर्सी जानी तय हो गई है लेकिन इस सबके बीच जो सबसे बड़ा संकट पैदा हुआ है वो यह है कि ब्रिटेन के टुकड़े-टुकड़े हो सकते हैं।ब्रिटेन के जनमत संग्रह से पहले जनमत संग्रह करवा चुका स्कॉटलैंड फिर से दोबारा जनमत संग्रह करवाने की तैयारी में है।
स्कॉटलैंड की प्रथम मंत्री निकोला स्टरजन ने जनमत संग्रह के बारे में कहा कि इन बदली हुई परिस्थितियों में स्कॉटलैंड को फिर से जनमत संग्रह का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा। इस जनमत संग्रह में स्कॉटलैंड के भविष्य पर वोटिंग होगी। ब्रिटेन से जुड़े रहने या न जुड़े रहने को लेकर होने वाला यह जनमत संग्रह अगर होता है यह बहुत बड़ी बात होगी।
स्टरजन के मुताबिक स्कॉटलैंड के अधिकतर लोगों ने ब्रिटेन को यूरोपियन यूनियन से अलग होने के विरोध में वोटिंग की है इस कारण स्कॉटलैंडवासियों की मर्जी के बिना ब्रिटेन का ईयू से अलग होना उचित नहीं है। गौर हो कि स्कॉटलैंड के 62 प्रतिशत लोगों ने ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से अलग होने के विरोध में और 38 प्रतिशत ने अलग होने के समर्थन में वोट डाले।

यूरोपियन यूनियन से कई और देश हो सकते हैं अलग!
ब्रिटेन के जनमत संग्रह ने एक और सवाल खड़ा कर दिया है कि 28 देशों का यूरोपियन यूनियन क्या और टूटेगा। ब्रिटेन के बाद कई और देश ऐसा कदम उठा सकते हैं। इस बारे में चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री बोहुस्लाव सोबोत्का कहते हैं कि ब्रिटेन के ईयू को छोडऩे से यूरोप में राष्ट्रीयता और अलगाववाद की एक अलग सी लहर चल सकती है। सबसे बड़ा मुद्दा यूरोपीय यूनियन की साझा मुद्रा यूरो है।

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