
टोक्यो ओलंपिक खेलों में शनिवार का दिन भारतीय दल के लिए स्वर्णिम सफलता लेकर आया । भारत के नीरज चोपड़ा ने जेवेलिन थ्रो में देश को एथलेटिक्स का पहला स्वर्ण पदक दिलाया। अपने करियर के बेहतरीन फॉर्म में चल रहे नीरज ने शुरुआत से ही पदक जीतने के तेवर साफ कर दिए थे और अपने पहले ही थ्रो में नीरज ने 87 मीटर की दूरी पार कर ली। नीरज का पहला थ्रो 87.03 मीटर का रहा । इसके बाद दूसरा थ्रो उन्होंने और भी बेहतर किया और 87.58 मीटर की दूरी तक भाला फेंक अपना पहला स्थान सुनिश्चित कर लिया। हालांकि नीरज का तीसरा थ्रो 76.79 मीटर का और छठा थ्रो 84.24 मीटर का किया लेकिन उनका सबसे अच्छा प्रयास 87.58 मीटर का थ्रो ही उन्हें स्वर्ण पदक दिला गया। वहीं दूसरे स्थान पर चेक रिपब्लिक के याकोब वाडलेच रहे जिन्होंने 86.67 मीटर दूरी तक सबसे अच्छा थ्रो किया। जबकि तीसरे स्थान पर भी चेक रिपब्लिक के एथलीट ही रहे। वेस्ली वितेज़लोव ने 85.44 मीटर दूरी तक थ्रो कर तीसरा स्थान हासिल किया।
इससे पहले क्वालिफिकेशन राउंड में भी नीरज ने 86.48 मीटर दूरी तक भाला फेंक कर आसानी से फाइनल 12 खिलाड़ियों में जगह बना ली थी। 23 साल के अब ओलंपिक चैंपियन, एशियाई चैंपियन और कॉमनवेल्थ चैंपियन तीनों ही बन गए हैं। 2018 में एशियन गेम्स के दौरान उन्होंने 88.06 मीटर तक भाला फेंक कर पहला स्थान हासिल किया था। हालांकि उनका पर्सनल बेस्ट थ्रो 88.07 मीटर का है जो राष्ट्रीय रिकार्ड भी है। वहीं 2018 के कॉमनवेल्थगेम्स में भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था। इसके अलावा नीरज 2016 में जूनियर वर्ल्ड खिताब भी अपने नाम कर चुके हैं। साल 2019 में कोहनी की चोट की वजह से उन्हें काफी दिनों तक खेल से दूर रहना पड़ा था और दोहा वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी हिस्सा नहीं ले पाए थे। नीरज चोपड़ा जर्मनी के उव्व होन से कोचिंग हासिल कर रहे हैं। और उव्व की सबसे बड़ी खासियत ये है कि उनके पास 104.80 मीटर का जेवेलिन का वर्ल्ड रिकार्ड है जो उन्होंने 1984 में रचा था। हालांकि इसके बाद 1986 में जेवेलिन थ्रो के नियमों में बदलाव करते हुए भाले के सेंटर ऑफ ग्रेविटी में भी बदलाव किया गया और तब से अब तक कोई भी एथलीट 100 मीटर की दूरी तक भाला नहीं फेंक पाया है।
नीरज का स्वर्ण पदक टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत के लिए सातवां पदक लेकर आया है और सात पदकों की जीत का ये प्रदर्शन अब तक हुए सभी ओलंपिक खेलों में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इसके पहले लंदन 2012 ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने छह पदक जीते थे। टोक्यो में भारत के नाम एक स्वर्ण, दो रजत, और चार कांस्य पदक रहे। इसी के साथ भारत ने अब तक ओलंपिक खेलों में कुल 35 पदक जीत लिए हैं। इसमें से एकल स्पर्धा में सिर्फ दो गोल्ड मैडल हैं जिसमें 2008 के बीजिंग ओलंपिक में अभिनव बिन्द्रा ने शूटिंग में गोल्ड मैडल जीता था वहीं नीरज ने जेवेलिन में गोल्ड जीता है। इसके अलावा 8 स्वर्ण पदक भारतीय हॉकी टीम ने जीते हैं जिसे मिलाकर कुल 10 स्वर्ण भारत के खाते में गए हैं। जबकि 9 ओलंपिक रजत पदक और 16 कांस्य पदक जीते हैं।
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