
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए दुनिया का हर व्यक्ति अपना योगदान दे रहा है। जिससे जो कुछ बन रहा वह करने की कोशिश कर रहा है। इसमें सबसे अहम भूमिका में हैं दुनियाभर के डॉक्टर। वह 24X7 लोगों की जान बचाने के लिए काम कर रहे हैं। इस कड़ी में एक ओलिंपिक चैंपियन का नाम भी जुड़ गया है।
कोरोना वायरस से जंग लड़ रही ओलिंपिक चैंपियन जोयसे सोमब्रोएक, डॉक्टर बन कर रहीं इलाजएम्सटरडम
लंदन ओलिंपिक 2012 में स्वर्ण पदक हासिल करने वाली नीदरलैंड की हॉकी टीम की गोलकीपर जोयसे सोमब्रोएक अब डॉक्टर के तौर पर देश में कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में जुटी हैं। लंदन ओलिंपिक में स्वर्ण पदक के अलावा उनके पास 2014 में विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक भी है। वह लगातार ‘सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर’ भी रही थी।
संन्यास के बाद बनीं डॉक्टर
26 साल की उम्र में खेल से संन्यास लेने के बाद उन्होंने एम्सटरडम में व्रिजे यूनिवर्सिटी से मेडिकल डिग्री पूरी की। अब वह हेजमट सूट (सुरक्षा कवच) पहनकर वायरस की चपेट में आए मरीजों का उपचार कर रही हैं।
देश के लिए खेले 117 मैच
नीदरलैंड के लिए 2010 से 2016 के बीच 117 मैच खेलने वाली डॉक्टर जोयसे ने एफआईएच वेबसाइट से कहा, ‘जब मैंने दो साल पहले पढ़ाई खत्म की तो मैंने इंटरनल मेडिसिन, पल्मोनरी, कार्डियोलॉजी और गैस्ट्रो-इंटेस्टिनल विभाग में काम करना शुरू किया।’
संन्यास सही फैसला था
उन्होंने कहा, ‘इसके बाद मैंने एम्सटरडम में बड़े अस्पताल में आपात कक्ष में काम करके और अनुभव हासिल किया। ’ तोक्यो ओलिंपिक के स्थगित होने के बारे में उन्होंने कहा कि यह फैसला सही था।
संन्यास का फैसला मुश्किल था
उन्होंने कहा, ‘मैं समझती हूं कि यह मुश्किल फैसला था। एक या दो महीने पहले मैंने भी सोचा था कि इनका आयोजन किया जा सकता था लेकिन वायरस बहुत तेजी से फैल रहा है।’
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