
पश्चिम एशिया संकट की वजह से होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। ऐसे में भारत ने ईरान के साथ सीधी बातचीत का रास्ता अपनाना ही बेहतर समझा है। इसी कड़ी में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान से सीधी बात की है, क्योंकि होर्मुज की बाधा को दूर करने के लिए इससे बेहतर कोई रास्ता नहीं है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक इंटरव्यू में कहा है कि ‘इस समय मैं उनके साथ बातचीत में लगा हुआ हूं और मेरी बातचीत के कुछ नतीजे निकले भी हैं।’ 15 मार्च को विदेश मंत्री का यह इंटरव्यू फाइनेंशियल टाइम्स में छपा है। इसमें उन्होंने बताया है कि बातचीत का दौर लगातार जारी है।
ईरान से विदेश मंत्री ने होर्मुज स्ट्रेट पर की सीधी बात – विदेश मंत्री ने कहा कि ‘अगर इससे मेरे लिए परिणाम आ रहे हैं,तो स्वाभाविक तौर पर मैं इसकी ओर देखना जारी रखूंगा।’ जयशंकर इससे पहले चार बार फोन पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बात कर चुके हैं। होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आवाजाही बाधित होने से भारत समेत कई देशों में कच्चे तेल और गैस का संकट खड़ा हुआ है।
एस जयशंकर बोले बातचीत से ही मिलता है समाधान – भारतीय विदेश मंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सैन्य दबाव से ज्यादा शांत कूटनीति ज्यादा प्रभावी हो सकती है। उनके अनुसार, ‘भारत के मद्देनजर निश्चित तौर पर यह अच्छा है कि हम आपस में तर्क करते हैं, तालमेल बिठाने की कोशिश करते हैं, कई बार हमें कोई समाधान मिल जाता है. तो कभी-कभी नहीं भी।’
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