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विश्व कप हॉकी में घरेलू दबाव को झेल नहीं पाई हमारी टीम – मीररंजन नेगी


लेखक : विवेक शर्मा

ओडिशा में खेले जा रहे रहे एफआईएच हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम पदक की रेस से बाहर हो गई है।
आखिर क्या वजह रही कि टीम क्वार्टरफाइनल तक भी नहीं पहुंच पाई। इस बारे में पूर्व हॉकी खिलाड़ी
मीररंजन नेगी एक खास बातचीत के दौरान बताते हैं कि टोक्यो ओलंपिक 2020 में एक लंबे अंतराल के बाद
भारत को कांस्य पदक मिला था। वर्ष 1980 के बाद यानी 41 साल के बाद टीम ओलंपिक में पदक जीती थी।
उसके बाद से हॉकी के प्रति लोगों का इंटरेस्ट और उम्मीदें भी बढ़ीं और इस विश्व कप से पहले हमारी रैंकिंग पांचवी थीं।
और सभी को उम्मीदें थीं कि इस बार भारतीय टीम कोई ना कोई पदक जरूर जीतेगी।
नेगीजी बताते हैं हमारी टीम घरेलू दबाव को बर्दाश्त नहीं कर सकी। वे बताते हैं कि  ये टीम बहुत ज्यादा प्रेशर में खेली है
और ये टीम वो नहीं थी जो  ओलंपिक में खेली है। वे बताते हैं कि जुगराज जैसे खिलाड़ी ने एक ही पेनल्टी कार्नर ही मार पाए।
वे अपने मुख्य हथियार को इस्तेमाल नहीं कर पाए।
इसके अलावा नेगीजी बताते हैं कि अभिषेक को टूर की खोज कहा गयालेकिन वे टूर्नामेंट में कुछ खास नहीं कर पाए।
वे बताते हैं कि हार्दिक सिंह सबसे अच्छा खेल रहे थे और वो चोटिल हो गए और वो एक
बहुत बड़ा झटका लगा। न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में अच्छा प्रदर्शन की उम्मीद थी।
लेकिन मैच का नतीजा भारत के पक्ष में नहीं जा पाया। भारत की उम्मीदें बिल्कुल शांत हो गईं।
मीररंजन नेगी के मुताबिक कोच ग्राहम रीड भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए।
नेगी बताते हैं कि उन्हें विनिंग स्किल्स पर काम करने की जरूरत थी और
खिलाड़यों से अच्छा प्रदर्शन निकलवाने की जरूरत थी और इस सबमें कोच फेल हो गए।
जिस तरह से 1983 में क्रिकेट विश्व कप जीतने के बाद खेल की तस्वीर पूरी बदल थी
और यही जीत का इंतजार इस बार हॉकी को भी था।
नेगीजी बताते हैं कि पूल मैचों के दौरान इंग्लैंड के खिलाफ मैच जीतना चाहए था और पूल में शीर्ष
स्थान पर रहते हुए क्वार्टर फाइनल में सीधे जगह बनानी चाहिए थी।
उऩके मुताबिक आजकल हॉकी में सभी 16 खिलाड़ी खेलते हैं और लगातार खेलते रहते हैं। आजकल 11खिलाड़ियों की टीम
नहीं होती है। खिलाड़ी अंदर बाहर जाते रहते हैं। हालांकि मीररंजन नेगी बताते हैं कि भारत ने
पहले मैच में स्पेन के खिलाफ धमाकेदार शुरुआत की थी।
उस मैच में गेंद पजेशन ज्यादातर समय तक भारत के पास था और दबदबा जबर्दस्त था।  लेकिन उसके बाद पता नहीं
क्या हुआ।
नेगीजी बताते हैं कि इस बार विश्व वजेता बनने की संभावना में दो टीमें काफी प्रबल दावेदार हैं
और ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम फाइनल खेलेंगी। और ऑस्ट्रेलिया विश्व
विजेता बन सकता है। उनके मुताबिक ऑस्ट्रेलिया की टीम बहुत तगड़ी है।