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पैरालिंपिक की स्वर्ण पदक विजेता चाहती हैं इच्छामृत्यु, जानिए क्यों

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रियो डि जेनेरियो: ओलिंपिक खेलों के समापन के बाद गुरुवार को ब्राजील के रियो डि जनेरो में 2016 के पैरालंपिक खेलों का आगाज हुआ है। मैराकाना स्टेडियम में आयोजित हुए उद्घाटन समारोह में सांबा गायकों ने समा बांधा। ब्राजील के पैरालंपिक तैराक डेनियल डायस ने ब्राजील के दल का नेतृत्व किया।

पैराएथलीट अंतिम बार स्वर्ण पदक जीतने के इरादे से उतरेंगी, क्योंकि इसके बाद वह अपना जीवन खत्म कर देगी। बेल्जियम की एथलीट मेरिके वेरवूर्ट ने स्पष्ट किया कि 2016 पैरालिंपिक खेल उनका अंतिम टूर्नामैंट होगा क्योंकि वह कुछ दिन इस धरती पर अंतिम दिन मान रही हैं। उन्होंने कहा- मेरे पास इच्छामृत्यु ही अंतिम विकल्प है।

दरअसल, वेरवूर्ट को रीड की हड्डी की बीमारी है, वह इतनी गंभीर हो चुकी है कि वह अब इच्छामृत्यु का विचार कर रही है,जो उनके देश में कानूनी तौर पर जायज है। 2012 लंदन पैरालिंपिक खेलों में 37 वर्षीय इस व्हीलचेयर एथलीट ने टी52 क्लास में 100 मी. रेस में स्वर्ण पदक जीता था और 200 मी. रेस में रजत पदक जीता था।

एक इंटरव्यू में वेरवूर्ट ने अपनी बीमारी के बारे में बताया कि प्रतिदिन की जद्दोजहद का विस्तार से उल्लेख किया और कई बार तो उनका दर्द असहनीय हो जाता है। उन्होंने कहा कि हर कोई मुझे स्वर्ण पदक के साथ मुस्कुराते हुए देखता है लेकिन कोई भी इसके पीछे के अंधेरे को नहीं देखता। मैं बहुत गंभीर स्थिति से गुजर रही हूं, कई बार तो रात को केवल 10 मिनट ही सो पाती हूं और इसके बावजूद स्वर्ण पदक जीतती हूं। लगातार अनिद्रा की वजह से वेरवूर्ट कभी भी बेहोश हो जाती हैं।

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