
वॉशिंगटनः अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है। ट्रंप की रेटिंग लगातार गिरती जा रही है और रूस के साथ संबंध के आरोपों के बाद सीनेट ट्रंप के खिलाफ महाभियोग चलाने की तैयारी कर रही है। हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के कई और सदस्य इस प्रयास में जुड़ने के लिए तैयार हैं। इस बीच ट्रंप की ही रिपब्लिकन्स पार्टी में ही दो धड़े हो गए हैं। हालांकि, रिपब्लिकन्स के हाथ में अभी कमान है और ट्रंप का समर्थन करने से ज्यादा अहम है कि पार्टी को स्थिर रखा जाए। रूस के साथ ट्रंप के संबंधों के आरोप लगातार सामने आते जा रहे हैं। ऐसे में सीनेट में रिपब्लिकन्स का दूसरा धड़ा मानता है कि महाभियोग के जरिए ट्रंप को हटाकर पार्टी को बचाया जा सकता है।
जिस तरह से हिलेरी क्लिंटन के घोटालों को लेकर ट्रंप उन्हें घेरते रहे हैं, उसी तरह से राष्ट्रपति पर आरोपों की लिस्ट भी लंबी हो रही है। जेम्स कॉमी को पद से हटाकर वह अपना चेहरा बचा सकते थे, लेकिन उन्होंने सिर्फ सतह को खरोंचकर व्हाइट हाउस में चार साल रहने के लिए अपनी संभावनाओं को सुधारा। ट्रंप ऐसे राष्ट्रपति हैं, जो पद पर चुने जाने से पहले मैक्सिको को प्रवासियों को दुष्कर्मी, अपराधी और हत्यारा कहते थे। रूस के साथ कोई संबंध नहीं रखने का उनका मंत्र झूठा साबित हुआ है। इसके बाद ट्रंप ने मुस्लिमों से बैन हटाया। यह भी महाभियोग के खिलाफ उनके मामलों को मजबूत नहीं करता है।
निःसंदेह हाउस डेमोक्रेट्स महाभियोग की कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं। कैलिफोर्निया से रिप्रजेंटेटिव मैक्सिन वाटर्स ने कहा कि वह ट्रंप के महाभियोग के लिए रोज लड़ाई लडेंगी। मिशिगन से रिपब्लिकन रिप्रजेंटेटिव जस्टिन अमैश ने कहा कि यदि ट्रंप ने कॉमी से माइकल फ्लिन की जांच रोकने के लिए कहा था, तो यह महाभियोग का आधार बन सकता है। इसके अलावा पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के पीछे हटने के लिए ट्रंप योजना बना चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय रूप से इस ट्रीटी को ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करने के लिए देशों को कदम उठाने के लिए बनाया गया था। मगर, ट्रंप के कदम के बाद इसे झटका लगेगा और इसे लेकर भी ट्रंप के खिलाफ गुस्सा बढ गया है।
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