
नहाते वक्त कान में पानी चला जाना या कान साफ करने के लिए माचिस की तिल्ली का इस्तेमाल करना एक आम बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह स्थितियां कान के गंभीर इंफेक्शन का कारण बन सकती हैं। ईएनटी डॉक्टर ने ईयर इंफेक्शन के 7 कारणों के बारे में बताया है और यह भी समझाया है कि आपको तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए।
अगर आपको कान में दर्द, कान बजना, कान में भारीपन जैसी तकलीफ हो रही है तो यह कान में इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। ईएनटी डॉक्टर होने के नाते मैं अधिकतर मामलों में इसके पीछे वायरल अपर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन, बैक्टीरियल इंफेक्शन, एलर्जी, कान में पानी जाना जैसे 7 कारण देखता हूं। इन स्थितियों के बेहतर इलाज के लिए ईयर इंफेक्शन के पीछे के कारण को समझना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि ट्रीटमेंट इसी बात पर निर्भर करता है कि कान के इंफेक्शन की शुरुआत कहां से और कैसे हुई है।
कान से जुड़े इस फैक्ट से अनजान हैं लोग – कान से जुड़ी एक रोचक जानकारी से अधिकतर लोग अनजान है। आपका कान यूस्टेशियन ट्यूब के जरिए शारीरिक और क्रियात्मक रूप से अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट से जुड़ा होता है। इसलिए जब इस ट्रैक्ट में इंफेक्शन, एलर्जी, कोई रुकावट या चोट जैसी स्थिति आती है तो कान के अंदर बैक्टीरिया या पानी विकसित हो सकता है। इसकी वजह से इंफ्लामेशन और दर्द होने लगता है।
1. वायरल अपर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन – मिडिल ईयर इंफेक्शन का सबसे आम कारण सामान्य जुकाम, इंफ्लुएंजा या अन्य वायरल डिजीज देखी जाती हैं, इसे एक्यूट ओटाइटिस मीडिया कहा जाता है। नाक और गले में इंफ्लामेशन आने की वजह से यूस्टेशियन ट्यूब ब्लॉक हो जाती है। यही नली कान के मिडिल हिस्से को गले के पिछले हिस्से से जोड़ती है। इसकी वजह से ईयरड्रम के पीछे पानी जमने लगता है और इंफेक्शन बन जाता है। बच्चों में यूस्टेशियन ट्यूब छोटी और हॉरिजोंटल होने की वजह से इसका खतरा ज्यादा रहता है।
क्या करना चाहिए – अधिकतर वायरल इंफेक्शन खुद ठीक हो जाते हैं, बस इसके लिए हाइड्रेशन, आराम और पैरासिटामोल या आइबूप्रोफेन जैसी सही एनाल्जेसिक दवाओं का ध्यान रखना होता है। अगर दर्द 24 से 72 घंटों से भी ज्यादा रहता है और लगातार गंभीर हो रहा है, साथ में कान से डिस्चार्ज हो रहा है तो डॉक्टर को दिखाना आवश्यक हो जाता है। यहां ध्यान रखें कि एंटीबायोटिक्स तभी दी जानी चाहिए, जब इंफेक्शन गंभीर हो।
2. बैक्टीरियल इंफेक्शन – वायरल इंफेक्शन के बाद कई बार स्ट्रेप्टोककस न्यूमोनिया, हीमोफिलस इंफ्लुएंजा जैसे बैक्टीरिया मिडिल ईयर में मौजूद पानी को शिकार बना लेते हैं। इसकी वजह से तेज दर्द, बुखार और कई बार सुनने में परेशानी जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
क्या करना चाहिए – इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। लक्षण गंभीर होने पर एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि रेजिस्टेंस को रोकने के लिए एंटीबायोटिक्स के गैरजरूरी इस्तेमाल से बचना चाहिए।
3. एलर्जी – एलर्जिक राइनाइटिस की वजह से नेजल पैसेज में लगातार सूजन हो सकती है और यूस्टेशियन ट्यूब डिस्फंक्शन हो सकता है। एलर्जी की वजह से कान के बीच वाले हिस्से में बार-बार तरल भरने से इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
क्या करना चाहिए – एलर्जी को कंट्रोल करना सबसे जरूरी है। एंटीहिस्टामाइन और नेजल स्टेरॉइड स्प्रे के इस्तेमाल के साथ एलर्जी के कारणों से दूर रहना जरूरी है। अगर बच्चों के कान में बार-बार पानी जमा हो रहा है तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
4. स्विमिंग या नमी – बार-बार पानी के संपर्क में आने से भी आउटर ईयर कैनाल के इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है, खासकर स्विमिंग पूल, तालाब या नमीदार वातावरण में रहने वाले लोगों को सावधान रहना चाहिए। इस समस्या को स्विमर्स ईयर या ओटाइटिस एक्सटर्ना कहा जाता है। नमी स्किन के बैरियर को कमजोर कर देती है और बैक्टीरिया या फंगस आसानी से शिकार बना लेते हैं।
क्या करना चाहिए – कानों को साफ और सूखा रखना चाहिए। स्विमिंग या पानी में नहाने के बाद कान को तिरछा करके पानी को बाहर निकालना चाहिए। कान में रूई, ईयर बड्स या नुकीली चीज डालने से बचें। अगर खुजली, दर्द या डिस्चार्ज हो रहा हो तो टॉपिकल एंटीबायोटिक या एंटीफंगल ड्रॉप्स का उपयोग करने की जरूरत पड़ सकती है।
5. किसी चीज से या सफाई के दौरान चोट लगना – कान साफ करने के लिए कॉटन बड्स, ईयर बड्स, हेयर पिन या माचिस की तिल्ली भीतर डालने से अंदर की नाजुक स्किन डैमेज हो सकती है। यह इंफेक्शन की शुरुआत का कारण बन सकता है।
क्या करना चाहिए – ईयर कैनाल में कोई भी चीज नहीं डालनी चाहिए। कान खुद को साफ करने की क्षमता रखता है। अगर मैल (वैक्स) की वजह से कान में ब्लॉकेज हो जाती है तो खुद साफ करने की जगह डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है।
6. एडेनोइड्स का बढ़ना – नाक के पिछले हिस्से में मौजूद एडेनोइड्स का साइज बढ़ने से बच्चों में यूस्टेशियन ट्यूब की ओपनिंग ब्लॉक हो सकती है। इसकी वजह से उनके अंदर मिडिल ईयर का इंफेक्शन बार-बार हो सकता है और अंदर पानी जम सकता है।
क्या करना चाहिए – बार-बार या लगातार इंफेक्शन होने जैसे संकेत को इग्नोर ना करें। कुछ मामलों में एडेनोइड को हटाना पड़ सकता है या वेंटिलेशन ट्यूब को डालना पड़ सकता है।
7. कमजोर इम्यूनिटी – डायबिटीज, लंबी बीमारी से जूझ रहे या इम्यूनोसप्रेशन के मरीजों में कान का गंभीर इंफेक्शन होने का खतरा अधिक होता है। इनमें से कुछ लोगों में मैलिग्नेंट ओटाइटिस एक्सटर्ना जैसी आक्रामक बीमारी भी देखने को मिल सकती है।
क्या करना चाहिए – इन बीमारियों को कंट्रोल रखना बहुत जरूरी है। हाई रिस्क ग्रुप में आने वाले लोगों को कान में तेज दर्द, सूजन या डिस्चार्ज होने पर तुरंत डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।
डॉक्टर को दिखाने में कब नहीं करनी चाहिए देर? – अगर कान में तेज दर्द, कान के पीछे सूजन, चेहरे की मसल्स में कमजोरी, लगातार तेज बुखार, चक्कर आना या अचानक सुनना बंद होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो आपको तुरंत इलाज की जरूरत होती है। यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। ध्यान रखें कि ईयर इंफेक्शन आम होते हैं, लेकिन कई बार खतरनाक भी साबित हो सकते हैं। वक्त पर इसके कारण को पहचानकर समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
Home / Lifestyle / कान बजना-दर्द हो सकता है ईयर इंफेक्शन का संकेत, ईएनटी के स्पेशलाइज्ड डॉक्टर ने बताए 7 कारण
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