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सलमान की अगली फिल्म ‘ट्यूबलाइटट’, भारत-चीन युद्ध के हीरो भारतीय सेना के मेजर शैतान सिंह पर आधारित

 6.-Directed-the-13th-Battalion-the-Kumaon-Regiment-the-Oldest-Regiment-in-Indiaसलमान खान की फिल्म ट्यूबलाइट की कहानी चीन से युद्ध पर आधारित है। चीन से युद्ध के रियल लाइफ हीरो शहीद मेजर शैतानसिंह जोधपुर के ही थे। मेजर शैतानसिंह की जोधपुर के पावटा सर्किल पर प्रतिमा भी लगी हुई है। इस फिल्म में सलमान की फाइटिंग प्रशंसकों को दीवाना बना देती है तो मेजर शैतानसिंह की बहादुरी की कहानी हमारा सीना फख्र से ऊंचा कर देती है।

 

सलमान खान  : रील लाइफ हीरो

सुल्तान के बाद सलमान खान के प्रशंसकों को उनकी आगामी फिल्म ट्यूब लाइट का बेसब्री से इंतजार है। नीलेश मिश्रा व कबीर खान लिखित और कबीर खान निर्देशिउन्हंे त 75 करोड़ की इस फिल्म को लेकर फैन्स बहुत उत्साहित हैं। इस रोमांटिक फिल्म में ज्हू ज्हू, सुहैल खान और उर्वशी रोतेला प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म अगले साल ईद पर रिलीज होगी।

बॉलीवुड के महानायक अभिनेता सलमान खान इन दिनों हर तरह से सुर्खियों में हैं। इसकी कई वजह हैं। कभी सिक्स पैक एब को लेकर, कभी शिकार, इफ्तार पार्टी, बयान और सजा की तैयारियों तो कभी सुल्तान को लेकर वे सुर्खियों में हैं। पहले मुंबई हिट एंड रन, फिर जोधपुर शिकार प्रकरण, उसके बाद मुंबई में बाबा सिद्दीकी की इफ्तार पार्टी में कैटरीना कैफ को लेकर, उसके बाद पहलवानों के साथ शूट के बाद हालात पर बयान दे कर विवादों में घिरे तो कभी कॉमेडी शो में उनकी चुहल सुर्खियों में रही।उन्हंे

इन दिनों सलमान खान ही सबसे ज्यादा सुर्खियों में हैं। अब प्रशंसक उनसे जुड़े बीइंग ह्यूूमन संगठन, फिल्म सुल्तान और आगामी फिल्म ट्यूबलाइट की हर खबर पर नजरें जमाए हुए हैं।

खबरों के मुताबिक फिल्म सुल्तान प्रशंसकों को पसंद आ रही है। हर जगह उसी के चर्चे हैं। सलमान की एक्टिंग, उनकी हंसी, उन पर फिल्माए गए गाने, उनके कपड़े, यानी सलमान खान की हर अदा उनके प्रशंसकों को दीवाना बना रही है।

l_salman-khan-57c3bb0e33b51_lरियल लाइफ हीरो मेजर दुश्मन को ललकारते रहे थे

परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतानसिंह जख्मों से चूर हो कर भी नौजवानों को दुश्मनों से मुकाबले के लिए ललकारते रहे थे।

वे लद्दाख में पहाड़ी पर मोर्चा संभाले हुए थे और चुशुल के करीब सड़क की सुरक्षा कर रहे थे। चीनियों ने सड़क तक पहुंचने के लिए चुसुल के लवारणी इलाके पर कब्जा कर लिया था। उस ऑपरेशन के लिए कंपनी प्लाटून ने दस-दस जवान की सात मोर्चों पर चौकियां बनाई थीं।

उसी दौरान 18 नवंबर 1962 की सुबह 4 बजे चीनी सेना ने दो प्लाटून पर हमला किया, तब मेजर शैतानसिंह और साथी जवानों ने दुश्मन को दोनों जगह से पीछे धकेल दिया।

उन्होंने चीनियों को मशीनगनों से भून कर रख दिया था। बांयी प्लाटून की ओर से आधे घंटे की जंग में इन भारतीय जवानों की जीत हुई,लेकिन दुश्मनों का दबाव जारी रहा और वे वार पर वार करते रहे।5.-Major-Shaitan-Singh-Battled-in-the-World’s-Toughest-Combat-Zones-in-Rezang-La

सूबेदार सुरजाराम (वीर चक्र) ने  मोर्टार  तोपों की गोलाबारी से  दुश्मनों को मौत के घाट उतार दिया। चीनियों ने इसकी परवाह न करते हुए मेजर शैतानसिंह की बांयी कंपनी के हैड क्वार्टर पर हमला किया, लड़ाई में कई चीनी मारे गए, लेकिन वे हमारी चौकी पर काबिज हो गए।

इस दौरान मेजर शैतानसिंह बुरी तरह जख्मी हो गए। उनके बाजू और पेट पर गोली लगी। इस बीच सेना से नीेचे से संपर्क कट गया।

जब जवान उठा कर नाले की ले जाने लगे तो उन्होंने मना किया। मेजर ने कहा, आदमी कम हैं, इसलिए नीचे जा कर रिपोर्ट करो। बुरी तरह जख्मी होने के कारण ( फोटो ) मेजर शैतानसिंह भाारतीय थल सेना की 13 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात मेजर भारत-चीन युद्ध के दौरान 18 नवंबर 1962 को लेह-लद्दाख में चुसुल एयरपोर्ट को बचाते हुए रिजांगला की लड़ाई में शहीद हो गए। शहीद होने के समय वे 37 वर्ष के थे। रिजांगला पहाड़ी पर लड़ाई में 120 में से 114 जवान शहीद हो गए थे।

 

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