
परमाणु शक्ति-संपन्न पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब का रक्षा समझौता पश्चिम एशिया में नए बदलाव का संकेत देता है। एक खुफिया नोट से पता चलता है कि यह समझौता सिर्फ एक दूसरे का सैन्य साधनों से बचाव तक सीमित नहीं है।
परमाणु बम से लैस पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बुधवार 17 सितम्बर को एक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते में घोषणा की गई है कि किसी भी देश पर हमले को दोनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। इस समझौते की टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण है, जो पिछले सप्ताह कतर पर इजरायली हमले के बाद किया गया है। दोहा पर इजरायली हमले ने खाड़ी के मुस्लिम देशों की चिंता बढ़ा दी है, ऐसे में परमाणु शक्ति-संपन्न पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब का रक्षा समझौता पश्चिम एशिया में नए बदलाव का संकेत देता है।
अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर कम होता भरोसा – रियाद और इस्लामाबाद के बीच यह रक्षा समझौता प्रतिरक्षा से कहीं ज्यादा है। न्यूज18 ने एक आकलन खुफिया नोट के हवाले से बताया है कि सऊदी अरब का अमेरिकी गारंटी पर भरोसा कम हो रहा है और वह अपनी सुरक्षा व्यवस्था को पुनर्गठित कर रहा है। नोट में कहा गया है कि रियाद अब पाकिस्तान की जनशक्ति, परमाणु विश्वसनीयता और युद्ध अनुभव की ओर झुक रहा है।
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