
ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले की अटकलों के बीच सऊदी अरब ने ऐसे किसी भी अभियान के लिए अपने एयर स्पेस या बेस का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देगा। अमेरिकी मीडिया ऑउटलेट फॉक्स न्यूज ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका का कैरियर स्ट्राइक ग्रुप विमानवाहक पोत USS अब्राबम लिंकन के साथ मिडिल ईस्ट में पहुंच चुका है। जीसीसी के सदस्य देश के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के बारे में खाड़ी देशों के सहयोगियों के साथ अपने मकसद या प्लान शेयर नहीं किए हैं।
इसी सप्ताह सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान (KBS) ने वॉशिंगटन में अधिकारियों के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की थी। इस बैठक का मकसद तनाव पर सऊदी और खाड़ी देशों की स्थिति को साफ करना था। बैठक के बारे में जानकारी रखने वाले GCC के वरिष्ठ अधिकारी कहा कि हमने यह बात दोस्तों की तरह कही है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वे (अमेरिकी) हमारी स्थिति और आकलन को समझें। हम अमेरिका के आकलन को भी ज्यादा से ज्यादा साफ तौर पर समझना चाहते हैं।
अमेरिका ने नहीं बताया ईरान प्लान – अधिकारी ने कहा, ‘मैं पूरी तरह से स्थिति साफ चाहता था और वह हमें नहीं मिली।’ ईरान पर हमले के लिए अमेरिकी सेना की मूवमेंट पर उन्होंने कहा कि ‘योजना सऊदी एयरस्पेस का इस्तेमाल करने से अलग है।’ अधिकारी ने कहा कि ईरान को लेकर सऊदी अरब का रुख अब भी वैसा ही है, जैसा जून 2025 में इजरायल और ईरान के बीच 12 दिवसीय संघर्ष के दौरान था।
ईरान के सामने ट्रंप ने रख दी मांग – इस बीच ईरान पर परमाणु समझौते को स्वीकार करने का दबाव बढ़ रहा है। इसके पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका ने ईरान को सीधे अपनी मांगे बता दी हैं। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्होंने कोई डेडलाइन दी है दो उन्होंने संकेत दिया कि समय सीमा निजी तौर पर बता दी गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने मिडिल ईस्ट में कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की मौजूदगी को ईरान से जोड़ा और कहा कि अमेरिकी बेड़ा कहीं तो रहेगा और जब ईरान से बातचीत हो रही है तो वह यहीं पास में रह सकता है। उन्होंने कहा कि ‘ईरान बात कर रहा है। हम देखें कि क्या हम कुछ कर सकते हैं। नहीं तो देखेंगे कि क्या होता है। हमारा एक बड़ा बेड़ा वहां जा रहा है।’
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