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सर कहते लम्बी हो फ़ायदा होगा , मैं उनसे भी लम्बी हो गयी: संधू

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सिंधु खेल रत्न सम्मान समारोेह से पहले नेशनल स्टेडियम पहुंचीं और वहां मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर उन्हें पुष्प अर्पित किए। ध्यानचंद का जन्मदिन ही देश में खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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ओलिंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाली देश की पहली एथलीट बनने पर सिंधु को खेल रत्न से सम्मानित किया गया


नई दिल्ली.ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट शटलर पीवी सिंधु… और सिंधु को गढ़ने वाले कोच पुलेला गोपीचंद। सोमवार को दोनों दिल्ली में थे। खेल रत्न अवॉर्ड प्रोग्राम के लिए। सिंधु को रेसलर साक्षी मलिक और जिमनास्ट दीपा कर्माकर के साथ खेल रत्न से नवाजा गया। इस सम्मान के मौके में रात में पार्टी दी गई। वहां लोग जब सिंधु के साथ सेल्फी लेते तो करीब 6 फीट लंबी सिंधु झुक जातीं। इस बीच सवाल-जवाब भी होते गए। हर सवाल के जवाब भी दिए, सिवाय एक को छोड़कर। जब सिंधु से पूछा गया कि क्या वे अपनी हमउम्र लड़कियों की तरह फैशन, ब्वॉयफ्रेंड, रोमांस जैसी बातें मिस करती हैं? जवाब में सिंधु शर्मा गईं और सिर नीचे कर बालों से छुपा लिया।

बात सिंधु के कद से शुरू होकर फाइनल मुकाबले की तैयारियों तक पहुंची…

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रियो ओलिंपिक में बैडमिंटन के फाइनल में सिल्वर जीतने के बाद कोच पुलेला गोपीचंद के साथ पीवी सिंधु।

1#छोटी उम्र की दिक्कतों पर 
सिंधु- साढ़े आठ साल की उम्र से खेलना शुरू किया। तब कोर्ट के हिसाब से मेरा कद छोटा था। गोपी सर मेरे हिसाब से कोर्ट बनवाते। पर तीन-चार महीने में लंबी हो जाती। तो गोपी सर को भी तैयारियां बदलनी पड़तीं। सर कहते लंबी होगी तो फायदे में रहोगी। आज मेरा कद सर से ज्यादा है (हंसते हुए)।

गोपी-बचपन से मूडी थी। पर ट्रेनिंग से इसने कोई समझौता नहीं किया।
2# खेल के दौरान शाउटिंग पर
गोपी- पहले जब ये मैच हार जाती तो रोने लगती। फिर मैंने कहा कि खेलते वक्त चिल्लाओ। अग्रेशन दिखेगा। दूसरे खिलाड़ी पर भी असर पड़ेगा और तुम्हारा तनाव भी कम होगा।

सिंधु-मैं अपना अग्रेशन शटल को हिट करने में निकालती हूं। इसके बाद चिल्लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
3# पढ़ाई और खेल में तालमेल पर

सिंधु-9वीं तक तो रोज स्कूल भी गई और एकेडमी भी। पर बाद में स्कूल ने सिर्फ एग्जाम के लिए अलाउ कर दिया। फिर किसी तरह से पढ़ाई संभली।

4#फाइनल की तैयारियों पर
सिंधु-मैं अपोनेंट को अच्छी तरह जानती थी। मैंने कैरोलिना के तमाम मैच देखे और सर से डिस्कस किया। पर मैच में उसने अच्छा खेला। इसीलिए मैंने उसे उठाकर बधाई दी। जब सर ने मुझसे कहा कि तुम ने आखिर तक अच्छा खेला तो मुझे संतोष हुआ।
5# लड़कियों ने बचाई इज्जत…
सिंधु- लड़कियों के लिए माता-पिता का सपोर्ट बहुत जरूरी है।
गोपी-अब केवल ‘सेव द गर्ल चाइल्ड’ ही नहीं ‘सपोर्ट द गर्ल चाइल्ड’ का नारा भी फैलाना होगा।

6# और आखिर में ये सवाल :चुनने का मौका हो तो फाइनल किसके साथ साइना या कैरोलिना?

सिंधु-मौका मिलने पर ही बता पाऊंगी।
गोपी-साइना को प्रेफर करेंगे, ताकि गोल्ड भी हमारा और सिल्वर भी।

क्या है सिंधु का अचीवमेंट

– सिंधु ने रियो ओलिंपिक में वुमन्स बैडमिंटन के फाइनल में हारकर भी इतिहास रचा और सिल्वर जीता। 92 साल से भारत ओलिंपिक में महिला एथलीट्स भेज रहा है। लेकिन सिल्वर जीतने वाली वे पहली महिला हैं। बैडमिंटन में भी पहली बार सिल्वर सिंधु ने ही दिलाया है।

 

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