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ओटीटी डेब्यू पर बोले सनी देओल- मैं चाह रहा हूं कि चारों तरफ लोग मुझे देखें, मेरी एक ऑडियंस बने


अपनी फिल्म ‘गदर 2’ की सफलता के बाद इन दिनों सनी देओल ‘जाट’ को लेकर चर्चा में है। वहीं अब वो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी डेब्यू करने जा रहे हैं। उनका कहना है कि समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि हर प्लेटफॉर्म के दर्शकों तक पहुंचना जरूरी है। इसलिए, वे अच्छी कहानी और अलग किरदार वाली कुछ फिल्में ओटीटी पर करेंगे।
एक लंबे समय तक सफलता का इंतजार करने के बाद अपनी फिल्म ‘गदर 2’ से बॉक्स ऑफिस पर गदर मचाने वाले सनी देओल एक ओर अपनी फिल्म ‘जाट’ की कमाई को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं, वहीं ‘लाहौर 1947’, ‘बॉर्डर 2’, ‘रामायण’ जैसी अपकमिंग फिल्मों लेकर भी चर्चा में हैं।
यही नहीं, लंबे समय तक बड़े पर्दे को ही तवज्जो देने वाले सनी पाजी अब ओटीटी पर भी डेब्यू करने वाले हैं। ओटीटी के प्रति अपनी सोच में बदलाव के बारे में सनी कहते हैं, ‘यह सही है कि मैं चाहता था कि मैं बड़े पर्दे की फिल्में ही करूं। मुझे ओटीटी का इतना शौक नहीं था, मुझे लगता था मुझे बिग स्क्रीन पर ही काम करना चाहिए, ताकि लोगों को यह ना लगे कि मैं ओटीटी कर रहा हूं, थिएटर की फिल्में नहीं कर रहा। लेकिन वक्त बीतने के साथ मुझे अहसास हुआ कि ओटीटी, सिनेमा हर प्लैटफॉर्म की ऑडियंस है।’
‘मैं चाह रहा हूं कि चारों तरफ लोग मुझे देखें’ – सनी देओल ने आगे कहा, ‘ये फॉर्मेट इसलिए बने हैं क्योंकि कई फिल्में ऐसी होती हैं, जो थिएटर में शायद वो रिकवरी ना कर पाएं, तो इस चक्कर में इंसान बंध जाता है। जबकि, ऑडियंस वैसा कॉन्टेंट भी देखना चाहती है। इसलिए, मैं एक दो फिल्में ऐसी कर रहा हूं, जिसमें कहानी अच्छी होगी, मुझे अलग कैरक्टर करने को मिलेगा, लोग इंजॉय करेंगे जिससे ओटीटी पर भी मेरी एक ऑडियंस बने। मैं चाह रहा हूं कि चारों तरफ लोग मुझे देखें।’
पापा की ‘हकीकत’ के चलते की थी ‘बॉर्डर’ – सनी देओल अपनी 1997 की सुपरहिट फिल्म ‘बॉर्डर’ का सीक्वल भी लेकर आ रहे हैं, जिसकी काफी चर्चा है। उसकी यादों के बारे में सनी बताते हैं, ‘असल में उस वक्त मेरा वॉर फिल्म करने का बहुत मन था। चूंकि, पापा (धर्मेंद्र) ने हकीकत की थी, तो मैं भी एक वॉर फिल्म करना चाहता था। तभी जेपी दत्ता ने बॉर्डर की कहानी सुनाई और उसी वक्त हमने तय कर लिया कि चलो, करते हैं। फिर, वो फिल्म इतनी स्पेशल बन गई। आज भी वह लोगों के दिलों में बैठी हुई है।’ सनी ने कहा, ‘ मैं बहुत से फौजियों को मिलता हूं जो कहते हैं कि मैं आपकी बॉर्डर देखकर फौजी बना, तो अच्छा लगता है जब वे कहते हैं कि जब हमें कुछ जोशीला करना होता है, तो हम बॉर्डर देखते हैं। आपको देखकर हमें जोश आता है तो अच्छा लगता है कि चलो, कुछ अच्छा ही किया है।’